भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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ये पांच ग्रह करणप्रद हैं। अथ भृगोः करणसंख्यां करणप्रद ग्रहांश्चाह- सुतायुर्विक्रमेष्वक्षितनुस्वव्ययखेष्विषुः ।।३८।। शुक्र से ५, ८, ३ भाव में २ करण, १, २, १२, १० भाव में ५ करण।।३८।। अष्टौस्त्रियामरौ षड्भूर्धर्मे मित्रेऽग्निखं भवे । लग्ने स्वेऽर्करविज्जीवमंदाः सर्वे च काम मे ।।३९।। ७ भाव में ८ करण, ६ भाव में ६ करण, ९ भाव में १ करण, ४ भाव में ३ करण और ११ भाव में शून्य करण होता है। शुक्र से १, २ भाव में सूर्य, भौम, गुरु, बुध, शनि ये ५ करणप्रद ग्रह हैं। ७ भाव में सूर्य, चंद्र, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और लग्न ये आठ करणप्रद ग्रह हैं।।३९।। अर्कार्यो विक्रमस्थाने सुतेऽर्कारौ शुभे रविः । सुखेऽर्कबुधजीवाः स्युर्भौमज्ञौ मृत्तिभे द्विज ।।४०।। ३ भाव में