बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६०६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । अथ भौमभावस्थानप्रदान्ग्रहानाह- लग्नमन्दकुजा भौमो होराज्ञेन्दुदिनाधिपाः । मन्दारौ झरवी ज्ञेन्दुजवार्कतनुभार्गवाः ॥५६॥ भौम से १ भाव में लग्न, शनि, भौम ये तीन रेखाप्रद हैं। २ भाव में भौम, ३ भाव में लग्न, बुध, चंद्र, सूर्य ये ४ रेखाप्रद हैं। ४ भाव में शनि, भौम। ५ भाव में बुध, सूर्य। ६ भाव में बुध, चंद्र, गुरु, सूर्य, लग्न, शुक्र ये ६ ग्रह ॥५६॥ मन्दारौ तौ सितश्चार्किकुजार्कार्यार्कि लग्नकाः । सर्वे गुरुसितौ स्थानं भौमस्यैवंविदुर्बुधाः ॥५७॥ ७ भाव में शनि, भौम, ८ भाव में शनि, भौम, शुक्र ये ३ रेखाप्रद हैं। ९ भाव में शनि, १० भाव में भौम, सूर्य, गुरु, शनि, लग्न ११ भाव में सूर्य, चंद्र, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, लग्न और १२ भाव में गुरु, शुक्र ये २ ग्रह