बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 610, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ें६०८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । में सूर्य, चंद्र, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, लग्न रेखाप्रद हैं। १० भाव में गुरु, बुध, सूर्य, शुक्र, लग्न ये रेखाप्रद हैं। शुक्र से १ भाव में लग्न, शुक्र, चंद्र ये ३ रेखाप्रद हैं। २ भाव में भी लग्न, शुक्र, चन्द्र रेखाप्रद हैं।।६२।। गुरुभावस्थानप्रदान्ग्रहानाह रे. सं. ५६ गुरोरष्टकवर्गः
| बृ. | शु. | श. | सू. | चं. | मं. | बु. | ल. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १ | २ | ३ | १ | २ | १ | १ | १ |
| २ | ५ | ५ | २ | ५ | २ | २ | २ |
| ३ | ६ | ६ | ३ | ७ | ४ | ४ | ४ |
| ४ | ९ | १२ | ४ | ९ | ७ | ५ | ५ |
| ७ | १० | ७ | ११ | ८ | ६ | ६ | |
| ८ | ११ | ८ | १० | ९ | ७ | ||
| १० | ९ | ११ | १० | ९ | |||
| ११ | १० | ११ | १० | ||||
| ११ | ११ |
[गुरोरष्टकवर्ग चक्रम्]
- लग्न (१): ।।।। बु ५ वृ
- द्वितीय (२): ।।।। सू. ४
- तृतीय (३): ।।। शु. ३ चं
- चतुर्थ (४): ।।।।।।। ४
- पञ्चम (५): ।।।।। २
- षष्ठ (६): ।।।।। १२
- सप्तम (७): ।।।।।। मं ११
- अष्टम (८): ।।।। १०
- नवम (९): ।।। ९
- दशम (१०): ।।।।।।।। १०
- एकादश (११): ।।।।।। ८ श
- द्वादश (१२): ।।।।। ६
अथ भृगोः भावस्थानप्रदान्ग्रहानाह- लग्नशुक्रेन्दवस्ते ते ज्ञार्कारास्ते ज्ञवर्जिताः ।।६३।। ३ भाव में लग्न, शुक्र, चंद्र, बुध, शनि, भौम ये ६ ग्रह रेखाप्रद हैं। ४ भाव में लग्न, शुक्र, चंद्र, भौम, सूर्य ये रेखाप्रद हैं।।६३।। सुतभे लग्नशशिजशशांकायर्किभार्गवाः । ज्ञारौ शून्यं सिताकेंदुगुरुलग्नशनैश्चराः ।।६४।। ५ भाव में लग्न, चंद्र, बुध, गुरु, शनि, शुक्र ये रेखाप्रद हैं। ६ भाव में बुध, भौम रेखाप्रद हैं। ७ भाव में शून्यरेखा। ८ भाव में शुक्र, सूर्य, चंद्र, गुरु, लग्न, शनि ये रेखाप्रद हैं।।६४।। सर्वे रविं बिना शुक्रगुरुमन्दाश्च मानभे । सर्वे कुजेन्दुरवयः क्रमाद्भृगुसुतस्य च ।।६५।। ९ भाव में चंद्र, भौम, गुरु, बुध, शुक्र, शनि, लग्न ये रेखाप्रद हैं। १० भाव में शुक्र, शनि रेखाप्रद हैं। ११ भाव में सूर्य, चन्द्र, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, लग्न ये रेखाप्रद हैं। १२ भाव में भौम, चंद्र, सूर्य ये रेखाप्रद हैं।।६५।।