भारतकोश
बृहत्संहिता (आचार्य वराहमिहिर - स्थापत्य, खगोल, मौसम व जल विज्ञान)

बृहत्संहिता (आचार्य वराहमिहिर - स्थापत्य, खगोल, मौसम व जल विज्ञान)

Brihat Samhita of Varahamihira with Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर / डॉ. सुरेशचन्द्र शास्त्री द्वारा

DevanagariHindipublished1,105 पृष्ठ

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पृष्ठ 455

बृहत्संहितायाम् उदीची रोग | अहि | मुख्य | भल्लाट | सोम | भुजङ्ग | अदिति | दिति | अग्नि, शिखी पापयक्ष्मा | रुद्र | आपः | पर्जन्य शोष | राजयक्ष्मा | पृथिवीधर | आपवत्स | जयन्त असुर | इन्द्र प्रतीची | वरुण | मित्र | ब्रह्मा | अर्यमा | सूर्य | प्राची कुसुमदन्त | सत्य सुग्रीव | इन्द्र | विवस्वान् | सविता | भृश दौवारिक | जय | सावित्र | अन्तरिक्ष पितृ | मृग | भृङ्गराज | गन्धर्व | यम | बृहत्क्षत | वितथ | पूषन् | अनिल दक्षिणा आपस्तथापवत्सः पर्जन्योऽग्निर्दितिश्च वर्गोऽयम् । एवं कोणे कोणे पदिकाः स्युः पञ्च पञ्च सुराः ॥४९॥ बाह्या द्विपदाः शेषास्ते विबुधा विंशतिः समाख्याताः । शेषाश्चत्वारोऽन्ये त्रिपदा दिक्श्वर्यमाद्यास्ते ॥५०॥