बृहत्संहिता (आचार्य वराहमिहिर - स्थापत्य, खगोल, मौसम व जल विज्ञान)
Brihat Samhita of Varahamihira with Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर / डॉ. सुरेशचन्द्र शास्त्री द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें43 Adhyaya Sloka | Adhyaya Sloka सम्पूर्णाङ्गोवामनो lxix 32 | सवज्रमुक्ताफल xliv 27 संमूर्च्छितारविन्दो xxxiv 1 | ,,वितरिङ्गष xlii 12 संवत्सररोगिनः viii 24 | ,,वितृंसहितः xlii 14 संस्थानविधिः iv 18 | ,,विद्युतःस्पृशतः xxii 4 संस्पृशती xxxiii 12 | ,,व्यगतेतमसि v 44 सरत्नतोयौषधि xxiv 7 | ,,व्यापसव्य v 43 ,,रःसुनलिनी lvi 4 | ,,व्यासव्योरुसं li 41 ,,रितश्चमहा xlviii 62 | ,,व्येनखेभ्रमद्भिः xcv 10 ,,रोनद्युदपानानां xlvi 89 | ,,शर्कराताम्र liv 104 ,,र्जरसरसा . lvii 6 | ,,शिष्यास्ते xlviii 61 ,,र्जरसश्री lxxvii 28 | ,,शिखिचातक xxiv 19 ,,र्जोदुम्बर xliv 4 | ,,स्येचदष्ट्रा xlvi 37 ,,र्त्तसुतरुषु xlvi 30 | ,,स्योपेतेक्षेत्रे xcv 32 ,,र्णावासः liv 38 | ,,हांचसहदेवीं xlviii 40 ,,र्वत्रभूर्वि xix 1 | साकेतकङ्क xiv 4 ,,र्वेदिगुत्थं xxxvi 3 | ,,चींतियः lxix 39 ,,र्वैद्रव्या lxxx 14 | ,,जमोदलवणा lxxvi 11 ,,वैदिक्ष्वशुभा xc 5 | ,,जेशतभिष x 17 ,,र्वस्पन्दनरचितो lxxix 17 | ,,द्यमनूकं lxviii 103 ,,र्वस्यसर्वकालं lxxix 1 | ,,मयजुर्भिर्मुनय xlviii 31 ,,र्वैत्वामभिषिञ्चन्तु xlviii 60 | ,,मान्यमिदं lx 22 ,,र्वेदुर्भिक्षकर्तारः lxxxvi 65 | ,,म्प्रतमयनं iii 2 ,,र्वेद्विगुणाया xlix 4 | ,,यंप्रातश्चधर्म lv 9 ,,र्वेषांवृक्षाणां liv 31 | ,,याश्रयमिति liii 21 ,,र्वोपकारानुगतस्य lxxv 9 | ,,रसकूजित lxxxviii 37 ,,लिलममर xii 12 | ,,रक्तेन liv 99 ,,लिलमयेश iv 2 | ,,पेंजलरुह x 7 ,,लिलविकारे xlvi 51 | ,,विप्रपौष्णा xcviii 16 ,,लिलोत्पत्ति xlvi 50 | ,,स्त्राविलरूक्षाक्ष्यो lxi 2 ,,लिलोद्यान lvi 3 | सितकुसुम lxxix 7