चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८८ पाठान्तर—१-आवा । २-सुहाबा । टिप्पणी—दीवेड्स प्रतिका यह पृष्ठ फटा है जिसके कारण अंतिम तीन चमक्रौकी पूर्व अर्द्धालियों तथा घत्तारो अभिसाख नष्ट हो गया है । पंजाब प्रतिका उपलब्ध फोटो भी अत्यन्त अस्पष्ट है जिसके कारण पप्ताके नष्ट अंशोंका समुचित उद्धार सम्भव न हो सका । (१) सफरी—मउली । सुभर पात भी सम्भव है—सुभर सरोवर हया चंकेि कराहिं (पद्मावत) । (२) अवगाह (सं —अगाध वकारके प्रस्लेवसे अवगाह)—गम्भीर, अथाह । बुडू—समाप्त हो गया । २३ ( रीवेड्स ४ ) सिफते जानावरों दर औं हौज गोयद ( सरोवरके जन्तुओंका वर्णन ) पैरहिं हंस माँछ महिंराहीं । चकवा चकवी केरि कराहीं ॥१ दबला ढेंक बैठ झरपाये । बगुला बगुली सहरी खाये ॥२ बनछेद सुबन पना जल छाये । अरु जलकुक्कुरी चर छाये ॥३ पसरी पुरइं कूल मतूला । हरियर पात बस रात फूला ॥४ पोंछी आइ बेस कर परा । फार फँरजवा अलहर भरा ॥५ सारस कुरलहिं रात, नींद तिल एक न आवइ ।६ सबद सुहाव कान पर, जागहिं रैन बिहावइ ॥७ टिप्पणी—(१) ढेंक—भोजन बगुला । सहरी—सफरी मछली । (४) पसरी—(ध प्रकार) फैली । पुरईं—पुरइन (सं पुण्ड्रिनी), कमल- की बेल । हरियर—हरी । पात—पत्ती । रात—(स रक्त) लाल । (५) पोंछी—पक्षी । बेस कर (मुहावरा)—नाना प्रकारके । कार— काला । फँरजवा—करज पक्षी विशेष । (६) कुरलहिं—रहते हैं । २४ ( रीवेड्स ५ ) सिफत रबक दर गिर्द शहर गोबर गोयद ( गोबर नगरकी खाईका वर्णन ) खाई देख गोवर [के] खाइ । पुरिस पचास फेर गहराई ॥१