चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१४ १—कबीरैं । २—विह्यो । ३—महिं । ४—अरूपा के नीन्ह । ५—अस मनुजहि आउ न काहू । ६—ठाव करी पख्व कियाहू । ७—कहौं । ८—कैंठ । टिप्पणी—(१) गिर्व—ग्रीवा, कण्ठ । विझाई—सुघरता । (५) हिये—हृदय । सिराउ—ठण्डा हुआ । (७) पियासौं—विज्वंस करूँ । प्यासौं—से आऊँ । ८७ (रौ०पृ०सं० ४१ क) तियते दो हस्त चौंरा गोपद (सुवा वर्णन) सुनहु सुआ दण्ड कहि लै शावठँ । यहँ जग ओ तस कछु न पायठँ ॥१ फदरि रँभ देखउँ वस बाँहँ । जर पौनार बिसेखी माहँ ॥२ इगुर जस सलोनी भीसा । अरु कित पुरुष हथौरिहिं दीसा ॥३ कर भाटू सनु (धर) सारे । बेध सदिस बाअ सिंगारे ॥४ ओर सुआ पुरुष पोसाळ । एको नियर न जियते पाठ ॥५ नउ फल राउत कें, घरे फेर गइ सान ।६ बइ झर लाग अनारी, राजा देय परान ॥७ मूलपाठ—१—बराबर । टिप्पणी—(४) दोनों पदोंका पाठ असन्तोषपूर्ण है। ८८ (रौ०पृ०सं० ५ अ; पंजाब [क]) तियते स्तान चौंरा गोपद (कुच वर्णन) सान धार हीयें शुन घर । रतन पदारथ मानिक भर' ॥१ सहज मियारा सेंदुर भर । घनहर पर कँदीर पर ॥२ नारंग घनहर उगहिं अपोला । पग न डगी पवन न डोला ॥३