चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४१ कै मन्त जस तुम्ह उपजे, राजा कीजइ सोइ । ६ उबत बर गइ तोरै, पुनि तजियावा होइ ॥ ७ १११ ( रीकेण्ड्स ६९ ) मुखबिरत करदे महर बालश्कर्याने मुकरिबे खुद (महरका अपने सेनानायकोंसे परामर्श) महरै मुख कँवरहिं फर चाहा । सेतस ढुरे इहँ बोले काहा ॥ १ बहुतहि कहा चाँद जो दीजै । एक मुख होइ राज पुनि कीजै ॥ २ और कहा बर निकर पराइ । दिवस चार पाहर कै आइ ॥ ३ कँवरू सँवरू दीने गारी । जे न जरमहिं सो माइ भथारी ॥ ४ मूँसहि पैठे पाटन गाँऊँ । अब बिठ देहुँ चाँद के ठाऊँ ॥ ५ जोलहि साँस पेट महँ, तौलहि करिहौं मारि । ६ पुनि सूरूज पह मरिहहिं, अइस होइ ठवियारि ॥ ७ ११२ ( रीकेण्ड्स ७० ) सिफत अस्पान राव महर (राव महरके अश्वोंका वर्णन) महरै काढ़ि तुखार फुलाने । इन्द दस घरे पौर मँह आने ॥ १ हंस हँसोली मँघर सुहाये । दिना यक सिंगारे बहु आये ॥ २ उदिर सँमुद सुइँ पाठन धरहिं । माघ गरभ ते नाचत रहैं ॥ ३ यह तुरंग तीन पा ठाढ़े । नीर दरियाइ पखरिन्द गाढ़े ॥ ४ पौर गरया अठरो अहा । इन्ह अस रूप जो जुत ते रहा ॥ ५ पाँन पाइ परत सम देंहीं, देखत रास उड़ाइ । ६ बहुरु धाव धरि धावहिं, धापै थिर न रहाहिं ॥ ७ टिप्पणी-(१) तुखार-घोड़ा । मूलतः यह मध्य एशिया संस्थित तुर्कोंक एक कबील