भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१४८ १-कसि । १-ख०-पौगा (पे के नीचे गुच्छे का अभाव है जिससे खेंया पढ़ा जाता है) । ३-पीहर । ४-कौरव कहें । ५-सँजोरि कराई । ६-बींग ।

१२२ ( रौदीन्हस ६८ ) आमदने मैना पेशि लोरक व गिरिया कर्दैन घ ( लोरकके सामने जाकर मैनाका विलाप ) आगे आइ ठाढ़ि धनि मैनाँ । नीर समुँद जस उलटै नैनाँ ॥१ चुइ-चुइ बूँद परहिं घनहारा । खनु टूटहिं गज मोतिहूँ हारा ॥२ जो तुम्ह है जूझे कै साधा । महिं सू मारि करहु दुइ आधा ॥३ तौ पीछे उठ सूझे आयहू । मोर असीस जीत घर जायहू ॥४ बाफर नारि सो झूझि न बाई । बाबन सिखण्डि रहा लुकाई ॥५ देहु असीस रोषन, मारि भाँठ घर आवहूँ । ६ सोने बेड़ि गड़ाइ, मोतिहूँ माँग भरावहूँ ॥७ टिप्पणी-(१) धनि-स्त्री पत्नी । मैना-लोरक्की पत्नी । (२) घनहारा-ठान । (५) सिखण्डि-शिखण्डी, महाभारत का एक पात्र जो नपुंसक था । (६) रोचन-टीका । (७) बेड़ि-पैर का एक आभूषण ।

१२३ ( अप्राप्य )

१२४ ( रौदीन्हस ८५ ; बम्बई ७ ) रफतन लोरक दर खानये अजबी व खदाना-ये मर्थ कर्दैन ङ ( लोरकका अजबीके घर जाना ) जैस अमीम दत गम पायहु । लारक राठ' जीति घर आयहु ॥१ लारक गा अजबी के धारा । भीतर हुवै सो आइ हँकारा ॥२