चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२११
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(रीकैण्ड्स २१०)
बाज गुजाइतने मैना अज कुतरयाना सूये खानये खुद
(मैनाका मन्दिरस अपने घर जाना)
चढ़ी पालकी मैना नारी। बिहँसि कुँवरि सब जोभनभरी ॥१ कोऊ आनि पूछि कैस सखि आई। से सब गोहन देउघर गई ॥२ पहँहिं चाँद कर पानि उतारा। इम सँह नारिह छिनार बितारा ॥३ हँसि हँसि भानि अवाकर कहाईं। मिलइँ सहेलिन फूट कराई ॥४ पानि उतारि मसि मुख लाइ। सो मसि मुख मैं घोइन आइ ॥५ झमकत आइ पालकी, सुख सों मन्दिर पइठ। ६ गयी सहेलीं घर घर, मैना सेज बइठ ॥७
२७४
(रीकैण्ड्स २१४)
पुरसीदने ग्वेलिन मैना रा कैरियते कुलहाना
(मैनापर ग्वालिनका मन्दिरकी बात पूछना)
ग्वालिन पूंछइ कहहु धनि मनौँ। देउ बारि कस पायहु रैनौँ ॥१ हाँ तुम घूमइ देउ पठाइ। और पाठ तिंह चाँदा आइ ॥२ इम आना यह नगरी तुम्हारी। ऊपर कदारन छतव धमारी ॥३ थार बहुत प्रेम कुछ बस्तेउँ। आज मा चाँदा कें फरतेउँ ॥४ इ सब लाग क अप्सरा। पाञ्जी सामोँ देउ दुआरा ॥५ मन भयउँ गजिपाउ, चाँद महमर आइ। ६ नाँक तनक क उदलउँ, छतउँ चीर छिनाइ ॥७