चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४४ टिप्पणी—(१) झगा—लम्बा ढीला कुरता अँगबरगा । (५) उहूँमाँ—वहाँ उस जगह । २९५ ( रीडेन्ड्स २३ : मनेर १४८ब ) शिनाख्तने कूँवरू लोरक रा दरमियाने राह अज पस्ते च चाँदा ( मार्गमें कुँवरूका लोरक और चाँदाको पहचानना ) कुँवरू आवध¹ चीन्हौं लोरू । धावा संखि चलायहु गोरू² ॥१ पाछें हेरत³ चाँदा भाई । जिउ कुँवरू कर गयउ उड़ाई ॥२ कइसि लोर सों भला न किया । कित ले चलों महर कै धिया ॥३ तिरियहि सरम नाँग भुखि होई । तिन्ह कँ⁴ सप न लागइ कोई ॥४ धूड़ी खोलिन तुम्हरी माई । तिहँकै मया न तुम्हे चित आई ॥५ बारि बियाही मैना माँझरि , लोरक आइ तुम्हार ॥६ पारि बूड़ ररि मरियेंहि, माइ बचन हमार ॥७ पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—शिनाख्तने कुँवरू लोरक रा (कुँवरूका लोरकको पहचानना) १—अगुवत । २—रहा सखि परा सब गोरु । ३—हेरन्त । ४— गुन्द । ५—रूख चढ़े । ६—तेउरे । ७—तिहके मयाँ न चित मूँह आई । ८—बारि बिदाही मैना । ९—म—करहि जिन्त तुम्हार । टिप्पणी—(१) आवध—आता हुआ । चीन्हौं—पहचाना । संखि—उद्यत होकर ! गोरू—ढोर, गाय भैंस आदि । (२) पाछे—पीछे । हेरत—देखते ही । (४) तिरियहि—स्त्रियों की । सरम—शर्म । नाँग—अरथ, बोदा । (७) ररि—रट रट कर । २९६ ( रीडेन्ड्स २३१ बम्बई २६ मनेर १४९क ) गुफ्तने बादा कुँवरू रा हिकायते इश्क ( चाँदका कुँवरूसे अपने प्रेमकी बात कहना ) चाँद कहा कुँवरू सुनु बाता । लोर मोर धिउ एकै¹ राता ॥१ जियतेँ जीठ² न छाड़ेउँ³ काछू । दिन अस मये सो सोग पठाऊँ ॥२