चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२९ बहि फर दूध दहि लीजइ, दस गुन दीजइ दान ॥६ सती रूप जस देखउँ, सिंह क बिदाई पान ॥७ टिप्पणी—(७) पाछौं—पीछे। उचावा—उठायी है। ४४३ (रैकीस ३१८ : सम्बत् ५९) खरीदने लरक शीर व दहानीदने मारू मर मैना रा ( लोरकका दूध खरीद कर मारू देना ) लेके दूध सो दरब दिवाया। सीप सिंघोरा माँग भरावा¹ ॥१ सेंदुर चन्दन सब फोउ लेई। मैना आपुन² करै न देई ॥२ सेंदुर सो करि बिह पिउ होई। नाँह मोर हरदी है सोई ॥३ [बोलहिं*] मुँहिका वह तज गयउ। साँसहि हम³ अस साध न मयउ ॥४ [निसि*] दिन हाँ दुख रोऊँ⁴। नींद न आवइ कैसें सोऊँ ॥५ रोवत दिस्टि घटानी, (घरी) चख कै जोत⁷।६ चाँद सुरुज तिह पर गहे, पास परी मुँइ लोट⁸ ॥७ मूलपाठ—६—कटी (हेने अभावके कारण यह पाठ है)। पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—सिरुदने लोरक शीर अज मेना व मारू दहानीदने ब मारू मुस्न मैके दिल रा ( लोरकका मनासे दूध खरीद कर धन देना और उसक हुलसकी पाह देना ) १—केर बहि दूध । २—आनि पठावा । ३—आपुहि । ४—मार नाँह । ५—जीवहि वह तज मॅहि बैह गवा । ६—मुहि । ७—मया । ८—दिन दिन आसू मोहू राऊँ । —गीन भए पल कात । ९— बीजु परी मुँइ लूट । टिप्पणी—(१) सो—हर । दरब—द्रव्य । दिवाया—दिलवाया । सीप—चाटका बना पानकार पात्र जिसमें अभिनन्दन-सामग्री यथा—रोली चन्दन सुपारी अक्षत (चावल) पंञ्चन आदि रखा जाता है। सिंघोरा— सिन्दूर रखनेका पात्र । माँग भरावा—माँगमें सिन्दूर लगानेका माँग भरना कहते हैं ।