चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३२४ दठर खाँड अभगी सर दीन्हौं । ठाठर टूटि लोर तिह चीन्हौं ॥४ वोहि उठि कै भये अँकवारा । [ - ] कै मैं तौं मारा ॥५ काहि लागि तूँ हाँकसु, उठहु आपुन पर आउ । ६ आगें दइ लोरक खेतस, छाहि पूत तुम्ह पाउ ॥७ ४५० ( रीफ़न्सूल १२२ ) दर रसीदने आमदने लोरक ब खाने मादर उफ्तादन ( लोरकका अपने घर आकर माँके पैर पड़ना ) चढ़ तुरी लोर घर आवा । पायँ लागि के माइ मनावा ॥१ नित कहि अस पूत न कीजइ । भूरि माइ कँ दुख न दीजइ ॥२ खोलिन बहुतें डोल आनी । चाँदा मैना दोनौं रानी ॥३ पायँ परी अँकवारी घरी । काजर सेंदुर दोऊ फरी ॥४ अगिन परबार क रमोइ बघारा । कोठा बारी सेज सँबारा ॥५ चाँद सुरुज औ मैनाँ, बरस सहस भा राज । ६ गावहिं गीत सहेलियाँ, गोबर मघावा आज । ७ टिप्पणी—(४) काजर—काजल । सेंदुर—सिन्दूर । ( ) बघारा—छौंका बघारा । कोठा—अट्टालिका । बारी—घर । ४५१ ( रीफ़न्सूल १२५ ) पुरसीदन लारक मादर रा व जवाब दादन मादर ( लोरकका माँस पूछना और माँका उत्तर देना ) लारक पूसहि कहु मई माई । कित धनि मैनाँ कितहुव भाई ॥१ तारैँ पाउ आपन आवा । बैनी मैना गाड़ी लावा ॥२ अजबी कर गगर उठ भारा । बैथी मैना आइ छुड़ारा ॥३