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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२५ प्रति जोधपुर राज्यके पुस्तकालयसे वासुदेवशरण अग्रवालको प्राप्त हुई है।¹ किन्तु यह सूचना निराधार और नितान्त भ्रामक है। इस प्रकारकी कोई प्रति न तो जोधपुर पुस्तकालयमें है और न कहीं अन्यत्रसे वासुदेवशरण अग्रवालको कोई पूरी प्रति प्राप्त हुई है। इसी प्रकार रावत सारस्वतने पूनाके डेकन कालेज पोस्ट ग्रेज्युएट रिसर्च इन्स्टीट्यूटमें चन्दायणके कुछ पृष्ठ होनेकी बात कही है। उसमें भी कोई तथ्य नहीं है। राय कृष्णदासने लिखा है कि लाहौरके प्रोफेसर शीरानीने चन्दायणकी एक प्रति प्राप्त की थी जिसके २४ सचित्र पृष्ठ तो लाहौर संग्रहालयने ले लिये और शेष पंजाब विश्वविद्यालयमें चले गये।² इस सूचनाका आधार क्या है, कहा नहीं जा सकता; किन्तु पंजाब विश्वविद्यालय (लाहौर) से पूछताछ करनेपर ज्ञात हुआ है कि उनके पुस्तकालयमें इस प्रकारका कोई ग्रन्थ नहीं है। परशुराम चतुर्वेदीने कस्तूरीके एक अंक³के आधारपर यह सूचना दी है कि एक पूर्ण प्रतिका पता हिन्दी विद्यापीठ आगराके उदयशंकर शास्त्रीको लगा है जो नागरी अक्षरोंमें लिखी गयी किन्तु अधिक मूल्य माँगे जानेके कारण क्रय नहीं की जा सकी। उदयशंकर शास्त्रीको जिस प्रतिके अस्तित्वकी जानकारी रही है वह वस्तुतः बीकानेरवाली ही प्रति है जिसका उल्लेख अलग करके चतुर्वेदीने एक अन्य प्रति होनेका भ्रम प्रस्तुत कर दिया है। ग्रन्थका आकार मूल प्रति उपलब्ध न होनेके कारण चन्दायणके आकारके सम्बन्धमें निश्चित रूपसे कुछ भी कहना कठिन है। हाँ बीकानेर प्रतिके आधारपर यह अनुमान किया जा सकता है कि इस काव्यमें कमसे कम ४०३ कड़वक होंगे। इस प्रतिमें आरम्भके ३८८ कड़वक हैं और उसके बाद १३ पृष्ठ छोड़कर पुष्पिका दी गयी है। यह बात इस ओर संकेत करती है कि ग्रन्थका कुछ अंश लिखनेसे रह गया है। उसे लिखनेके लिए ही लिपिकारने पृष्ठ खाली छोड़ दिये थे। अन्तका अंश खण्डित है इसका समर्थन रीठेण्ड्स प्रतिसे भी होता है। रीठेण्ड्स प्रतिमें बीकानेर प्रतिके अन्तिम कड़वकके आगेके पर्याप्त अंश उपलब्ध हैं। अस्तु बीकानेर प्रतिकी पंक्तियोंकी गणनाके आधार पर कहा जा सकता है कि उसके १३ खाली पृष्ठोंपर १५ कड़वक लिखे जाते। इस प्रकार सम्पूर्ण ग्रन्थमें ४०३ कड़वक होनेका अनुमान होता है। इन उपलब्ध प्रतियोंमें रीठेण्ड्स प्रति सबसे बड़ी है। उसमें ३४९ कड़वक हैं। अन्य प्रतियोंमें अधिकांश कड़वक ऐसे हैं जो रीठेण्ड्स प्रतिमें उपलब्ध हैं। इस कारण १. भारतीय साहित्य आगरा वर्ष १ अंक पृ १८९। २. कविताकौमुदी दिल्ली अंक १२ पृ ७१। ३. परम्परा यूनिवर्सिटी सम्वत् १९६ पृ ६९। ४. हिन्दीके सूफी प्रेमाख्यान पृ २९।