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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 404

मण्डपमें जाने दो। यह सुनकर भिताने दरवाजा खोल दिया और वह भीतर घुस गया। सखियोंमें घुसकर वह भी मंगलाचार गान लगा। सभी सखियोंका स्वर एक-सा उठता था, किन्तु डढियाके स्वरमें अन्तर पड़ जाता था। यह देखकर सभी सखियोंको एकाएक सन्देह हो गया कि स्त्रीका वेश बदलकर कोई पुरुष हमारे बीच घुस गया है। यह सोच- कर उन्होंने गाना बन्द कर दिया। मंजरी सोचने लगी कि इन लोगोंने गाना क्यों बन्द कर दिया और उनकी ओर देखने लगी। देखते ही उसने डढियाको पहचान लिया। वह सोचने लगी कि शत्रु मण्डपमें घुस आया है। वह स्वामीको मारकर मुझे कोहबरमें ही विधवा बना देगा। अतः कोई ऐसा उपाय करना चाहिए कि स्वामीको यह बात मालूम हो जाय। लेकिन यदि मैं बोलती हूँ तो मण्डपमें लोग हँसी उड़ायेंगे कि अभी ब्याह हुआ नहीं कि मैं अपने पतिसे बात करने लगी। इसलिए कोई दूसरा उपाय निकालना चाहिए। यह सोचकर नींद आनेका बहानाकर वह आगे-पीछे, दायें-बायें झुकने लगी और जाकर लोरिकके ऊपर झुक पड़ी और उँगलीसे खोदकर संकेत लगी। लोरिकने सोचा कि इम कैसी पागल स्त्री मिली है, जो कोहबर पर ही मुझे खोद रही है। घर जानेपर पता नहीं क्या करेगी। वह यह बात सोच रहा था कि सारी सखियाँ एक-एक कर मिलने आने लगीं और जब सब मिल चुकीं तो डढिया सामने आया। उस समय फिर मंजरीने उसे उकसाया। तब लोरिकको ध्यान आया कि शत्रुको देखकर पत्नी मुझे चेतावनी दे रही है। डढियाको देखते ही उसने ध्यान किया कि वह स्त्री नहीं है और खड्ग लेकर होशियार हो गया। जब डढिया आकर लोरिकके बगलमें खड़ा हुआ तब लोरिकने उसे ध्यानसे देखा। जिस चादरसे उसका मंजरीके साथ गठबन्धन हुआ था उसे तत्काल उतारकर उसने एक तरफ रख दिया और खड़ा हो गया फिर उसने डढियाकी साड़ीका छोर खींच लिया। वह नंगा होकर भागा। तदनन्तर सखिया वर-वधूको कोहबर ले गयीं और उनके साथ मज़ाक करने लगीं। जब वे चली गयीं तब लोरिकने मंजरीसे कहा—जब मैं विवाहके लिए चलने लगा था तो भाभी मदागिनने मुझे पावक बनाकर सिखाया था और कहा था कि जब तुम विवाह करके कोहबरमें जाओगे तभी भूख लगेगी। उनकी बात सच जान पड़ती है। अब मुझे भूख लगी है। मंजरी बोली—जब सब सखियाँ यहाँ थीं तब तो आपने कुछ कहा नहीं। उस समय तो मैं चावल मंगाकर आपको खिला भी देती। अब वे चली गयीं तब आप कह रहे हैं। मैं कैसे खिलाऊँ ! रसोई घरके दरवाजेपर भाभी खड़ी हुई हैं। मैं जाती हूँ और अगर वह जाग गयीं तो मेरा बड़ा उपहास होगा। अब रात भर चुपचाप पड़े रहिए। सुबह सखियाँ आयेंगी तब मैं भोजन मँगा दूँगी। लोरिक बोला—नहीं मुझे तो इसी समय कादोंकी भूख लगी है। यह सुनकर मंजरीने सोचा कि ये मेरे सत्त्वकी परीक्षा ले रहे हैं। वस्तुतः उसने