चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७४ समझाना ४८-चाँद का उत्तर; ४९-साहस क्रोध ५०-सहदेव को सूचना; ५१-चाँद का मैके भेजना; ५२-सहेलियों से भेंट। व्यथा-वर्णन- ५३-५४-माघ मास; ५५-फागुन मास ५६-चैत मास। (यह अंश बारहमासा के रूप में है। अतः उसमें कम से कम १२ कड़वक रहे होंगे। किन्तु तीन ही मास सम्बन्धी कड़वक उपलब्ध हैं। उपलब्ध कड़वक भी अधूरे हैं जो पंजाब प्रति से प्राप्त हुए हैं।) बाजिर का चाँद-दर्शन- ६६-बाजिर का चाँद को देखकर मूर्च्छित होना ६७-जनता का बाजिर से मूर्च्छा का कारण पूछना; ६८ ६९-बाजिर का उत्तर, ७०-बाजिर का नगर छोड़ कर जाना ७१-दूसरे नगर में पहुँचकर बाजिर का गाना; ७२-राजा रूपचन्द का बाजिर को बुलाना; ७३-बाजिर का चाँद दर्शन की बात कहना; ७४-चाँद के प्रति राजा की जिज्ञासा। चाँद की रूप-चर्चा- ७५-माँग ७६-केश; ७७-ललाट; ७८-भौंह; ७९-नेत्र; ८०-नासिका ८१- अधर ८२-दाँत; ८३-रसना; ८४-कपोल; ८५-तिल; ८६-ग्रीवा ८७-भुजाएँ; ८८-कुच; ८९-पेट ९०-पीठ ९१-जानु ९२ पग और गति; ९३-आचार; ९४-वस्त्र; ९५-आभूषण। रूपचन्द का सहदेव पर आक्रमण- ९६ ९७-कूच की तैयारी; ९८-रूपचन्द के अस्त्र ९९-दलक हाथी; १००-सेना की कूच; १०१-मार्ग में अपशकुन; १०२-गोबर नगर पर घेरा १०३-नगर में आतंक; १०४-सहदेव का रूपचन्द के पास दूत भेजना १०५-दूतों को रूपचन्द का उत्तर; १०६-दूतों का समझाना; १०७-दूतों पर रूपचन्द का क्रोध १०८-दूतों को मारने का आदेश १०९-रूपचन्द का चाँद की माँग करना; ११०-दूतों का लौटना; १११ सहदेव का अपने सेनानायकों से परामर्श ११२-सहदेव के अस्त्र; ११३- उसके अश्वारोही ११४-धनुर्धर ११५-रथ ११६-हस्ति। रूपचन्द-सहदेव युद्ध- ११७-सेनाओं का युद्धक्षेत्र में आना; ११८-नेबक साँढा का युद्ध; ११९-रूपचन्द की सेना में विखलभल मच जाना १२०-गोरक के पास भाट का जाना; १२१-गोरक का युद्ध के लिये तैयार होना १२२-मैना का गोरक को युद्ध में जाने से रोकना; १२४- गोरक का जलकी के घर जाना १२५-अम्भी का युद्ध-कौतुक बतलाना; १२६- गोरक का महर के पास पहुँचना १२७-गोरक का युद्ध के मैदान में आना; १२८- गोरक की सेना १२९-उसे देखकर रूपचन्द का स्तम्भित होना और दूत भेजना;