भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 196, कुल 978 में से

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पृष्ठ 196
१९२छान्दोग्योपनिषद्[ अध्याय २

| मागमागमिनीम्, वामदेव्यसामोपासनाङ्गत्वेन विधानात्। एतस्मादन्यत्रप्रतिषेधस्मृतयः। वचनप्रामाण्याच्च धर्माविगतेर्न प्रतिषेधशास्त्रेणास्य विरोधः ॥ २ ॥ | करे; क्योंकि वामदेव्य सामोपासनाके अङ्गरूपसे इसका विधान किया गया है। स्मृतियोंके निषेध-वचन इस वामदेव्योपासनासे अन्यत्र ही लागू होते हैं। श्रुतिके वचनोंके प्रमाणसे ही धर्मका निश्चय होता है, अतः निषेधशास्त्रके साथ इस विधिका विरोध नहीं है ॥ २ ॥ |

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इतिच्छान्दोग्योपनिषदि द्वितीयाध्याये त्रयोदशखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ १३ ॥
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चतुर्दश खण्ड

बृहत्सामकी उपासना

उद्यन्हिङ्कार उदितः प्रस्तावो मध्यन्दिन उद्गीथोऽपराह्नः प्रतिहारोऽस्तंयन्निधनमेतद्बृहदादित्येप्रोतम् ॥ १ ॥

उदित होता हुआ सूर्य हिंकार है, उदित हुआ प्रस्ताव है, मध्याह्नकालिक सूर्य उद्गीथ है, मध्याह्नोत्तरकालिक प्रतिहार है और जो अस्तमित होनेवाला सूर्य है, वह निधन है । यह बृहत्साम सूर्यमें स्थित है ॥ १ ॥

उद्यन्सविता स हिंकारः। प्राथम्याद्दर्शनस्य । उदितः प्रस्तावः प्रस्तवनहेतुत्वात्कर्मणाम् । मध्यन्दिन उद्गीथः श्रेष्ठत्वात् । अपराह्नः प्रतिहारः पश्वादीनां गृहान् प्रति हरणात् । यदस्तं यंस्तन्निधनं रात्रौ गृहे निधानात् प्राणिनाम् । एतद्बृहदादित्ये प्रोतं बृहत आदित्यदैवत्यत्वात् ॥ १ ॥उदित होता हुआ जो सूर्य है वह हिंकार है, क्योंकि उसका दर्शन सबसे पहले होता है । उदित हुआ सूर्य कर्मोंके प्रस्तवनका हेतु होनेके कारण प्रस्ताव है । मध्याह्नकालीन सूर्य उत्कृष्ट होनेके कारण उद्गीथ है । पशु आदिको घरोंकी ओर ले जानेके कारण अपराह्न सूर्य प्रतिहार है । तथा जो अस्तको प्राप्त होनेवाला सूर्य है वह रातमें सम्पूर्ण प्राणियोंको अपने घरोंमें निहित करनेवाला होनेसे निधन है । यह बृहत्साम सूर्यमें स्थित है, क्योंकि बृहत्का सूर्य ही देवता है ॥ १ ॥