छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
पृष्ठ 353, कुल 978 में से
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खण्ड १९ ] शाङ्करभाष्यार्थ [ ३४९
और सारे भोग हुए हैं । इसीसे उसका उदय और अस्त होनेपर दीर्घ-शब्दयुक्त घोष उत्पन्न होते हैं तथा सम्पूर्ण प्राणी और सारे भोग भी उत्पन्न होते हैं ॥ ३ ॥
| संस्कृत-भाष्य | भाष्यार्थ |
|---|---|
| अथ यत्तदजायत गर्भरूपं तस्मिन्नण्डे, सोऽसावादित्यः, | फिर उस अण्डेमें जो गर्भरूपसे उत्पन्न हुआ वह यह आदित्य है। |
| तमादित्यं जायमानं घोषाःशब्दा | उस आदित्यके उत्पन्न होनेपर |
| उलूळव ऊरुरवो विस्तीर्णरवा | उलूळव—ऊरुरव यानी सुदूरव्यापी शब्दवाले घोष-शब्द उपस्थित हुए— |
| उदतिष्ठन्नुत्थितवन्तः, ईश्वरस्येवेह प्रथमपुत्रजन्मनि; सर्वाणि च | उत्पन्न हुए, जिस प्रकार कि लोकमें किसी राजाके यहाँ प्रथम पुत्रजन्म होनेपर [ उत्सवपूर्ण कोलाहल हुआ करता है ] तथा उसी समय |
| स्थावरजङ्गमानि भूतानि सर्वे च | समस्त स्थावर-जङ्गम जीव और उन |
| तेषां भूतानां कामाः काम्यन्त इति विषयाः स्त्रीवस्त्रान्नादयः । | जीवोंके काम—जिनकी कामना की जाती है वे स्त्री, वस्त्र एवं अन्न आदि विषय उत्पन्न हुए । |
| यस्मादादित्यजन्मनिमित्ता | क्योंकि प्राणिवर्ग और उसके भोगोंकी उत्पत्ति आदित्यके जन्मके |
| भूतकामोत्पत्तिस्तस्मादद्यत्वेऽपि | कारण ही हुई है इसलिये आजकल |
| तस्यादित्यस्योदयं प्रति प्रत्यायनं प्रत्यस्तगमनं च प्रति, अथवा | भी उस सूर्यदेवके उदयके प्रति और प्रत्यायन अर्थात् प्रत्यस्तगमन (अस्त) के प्रति अथवा पुनःपुनः |
| पुनः पुनः प्रत्यागमनं प्रत्यायनं तत्प्रति तन्निमित्तीकृत्येत्यर्थः, | प्रत्यागमन ही प्रत्यायन है, उसके प्रति अर्थात् उसे ही निमित्त बनाकर |
| सर्वाणि च भूतानि सर्वे च कामा घोषा उलूळवश्चानूत्तिष्ठ- | सम्पूर्ण भूत, सारे भोग और दीर्घ शब्दयुक्त घोष उत्पन्न होते हैं । |