भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 393, कुल 978 में से

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पृष्ठ 393

षष्ठ खण्ड

अग्निद्वारा ब्रह्मके द्वितीय पादका उपदेश

अग्निष्टे पादं वक्तेति स ह श्वोभूते गा अभिप्रस्था-
पयाञ्चकार । ता यत्राभिसायं बभूवुस्तत्राग्निमुपसमा-
धाय गा उपरुध्य समिधमाधाय पश्चादग्नेः प्राङ्-
पोपविवेश ॥ १ ॥

‘अग्नि तुझे [ दूसरा ] पाद बतलावेगा’—ऐसा [कहकर वृषभ मौन हो गया ] । दूसरे दिन उसने गौओंको [ गुरुकुलकी ओर ] हाँक दिया। वे सायंकालमें जहाँ एकत्रित हुईं वहीं अग्नि प्रज्वलित कर गौओंको रोक समिधाधान कर अग्निके पश्चिम पूर्वाभिमुख होकर बैठ गया ॥ १ ॥

| सोऽग्निस्ते पादं वक्तेत्युपररामर्षभः । स सत्यकामो ह श्वोभूते परेद्युर्नैत्यकं नित्यं कर्म कृत्वा गा अभिप्रस्थापयाञ्चकाराचार्यकुलं प्रति । ताः शनैश्चरन्त्य आचार्यकुलाभिमुख्यः प्रस्थिता यत्र यस्मिन्काले देशेऽभि सायं निशायामभिसंबभूवुरेकत्राभिमुख्यः संभूताः । तत्राग्निमुपसमाधाय गा उपरुध्य समिधमाधाय पश्चादग्नेः प्राङुपोपविवेश ऋषभवचो ध्यायन् ॥ १ ॥ | वह साँड 'अग्नि तुझे [दूसरा] पाद बतलावेगा'—ऐसा कहकर मौन हो गया । दूसरे दिन सत्यकामने नैत्यक—नित्यकर्म करनेके अनन्तर गौओंको गुरुकुलकी ओर चला दिया । वे गुरुकुलकी ओर धीरे-धीरे चलती हुई जिस समय और जिस स्थानमें अभि सायम्—रातमें एकत्रित हुईं वहीं अग्नि स्थापित कर गौओंको रोक समिधाधान कर साँडके वचनोंको याद करता हुआ अग्निके पश्चिम पूर्वाभिमुख होकर बैठ गया ॥ १ ॥ |


तमग्निरभ्युवाद सत्यकाम ३ इति भगव इति
ह प्रतिशुश्राव ॥ २ ॥

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