छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
पृष्ठ 643, कुल 978 में से
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| खण्ड ७ ] | शाङ्करभाष्यार्थ | ६३१ |
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| पितुरुक्तं मनआदीनामन्नादिमयत्वं विज्ञौ विज्ञातवाञ्श्वेतकेतुः । द्विरभ्यासस्त्रिवृत्करणप्रकरणसमाप्त्यर्थः ॥ ६ ॥ | इसका तात्पर्य है । इस प्रकार पिताके कहे हुए इस मन आदिके अन्नादिमयत्वको श्वेतकेतु विशेष-रूपसे समझ गया । 'विज्ञौ इति' इन पदोंकी द्विरुक्ति त्रिवृत्करणके प्रकरणकी समाप्तिके लिये है ॥६॥ |
इतिच्छान्दोग्योपनिषदि षष्ठाध्याये सप्तमखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ ७ ॥