छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 723, कुल 978 में से
संदर्भ में पढ़ेंखण्ड १ ] शाङ्करभाष्यार्थ ७१९
भूतविद्या, धनुर्वेद, ज्योतिष, गारुड, संगीतादिकला और शिल्पविद्या-- ये सब भी नाम ही हैं तुम नामकी उपासना करो ॥ ४ ॥
| नाम वा ऋग्वेदो यजुर्वेद इत्यादि नामैवैतत् । नामोपास्स्व ब्रह्मेति ब्रह्मबुद्ध्या । यथा प्रतिमां विष्णुबुद्ध्योपास्ते तद्वत् ॥ ४ ॥ | ऋग्वेद नाम ही है, तथा यजुर्वेद इत्यादि ये सब भी नाम ही हैं । अतः जिस प्रकार विष्णु-बुद्धिसे प्रतिमाकी उपासना करते हैं उसी प्रकार तुम नामकी 'यह ब्रह्म है' ऐसी ब्रह्मबुद्धिसे उपासना करो ॥ ४ ॥ |
स यो नाम ब्रह्मेत्युपास्ते यावन्नाम्नो गतं तत्रास्य कामचारो भवति यो नाम ब्रह्मेत्युपास्तेऽस्ति भगवो नाम्नो भूय इति नाम्नो वाव भूयोऽस्तीति तन्मे भगवान्ब्रवीत्विति ॥ ५ ॥
वह जो कि नामको 'यह ब्रह्म है' ऐसी उपासना करता है उसकी जहाँतक नामकी गति होती है वहाँतक यथेच्छ गति हो जाती है, जो कि नामकी 'यह ब्रह्म है' ऐसी उपासना करता है । [ नारद-- ] 'भगवन् ! क्या नामसे भी अधिक कुछ है ?' [ सनत्कुमार-- ] 'नामसे भी अधिक है ।' [ नारद— ] 'तो भगवन् ! मुझे वही बतलावें' ॥ ५ ॥
| स यस्तु नाम ब्रह्मेत्युपास्ते तस्य यत्फलं भवति तच्छृणु,—या- | वह जो कि 'नाम ब्रह्म है' ऐसी उपासना करता है उसे जो फल मिलता है वह सुनो--जहाँतक |