छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
पृष्ठ 767, कुल 978 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 767
<div align="center">
<div align="center">
| खण्ड ११] | शाङ्करभाष्यार्थ | ७६३ |
|---|
| भूयस्त्वात्स्मरमुपास्स्वेति ॥१॥ | अतः उत्कृष्ट होनेके कारण तुम स्मरणकी उपासना करो ॥ १ ॥ |
|---|
—: ० :—
</div>स यः स्मरं ब्रह्मेत्युपास्ते यावत्स्मरस्य गतं तत्रास्य यथाकामचारो भवति यः स्मरं ब्रह्मेत्युपास्तेऽस्ति भगवः स्मराद्भूय इति स्मराद्वाव भूयोऽस्तीति तन्मे भगवान्ब्रवीत्विति ॥ २ ॥
वह जो कि स्मरकी 'यह ब्रह्म है' इस प्रकार उपासना करता है, उसकी जहाँतक स्मरकी गति है वहाँतक स्वेच्छागति हो जाती है, जो कि स्मरकी 'यह ब्रह्म है' इस प्रकार उपासना करता है । [ नारद—] 'भगवन् ! क्या स्मरसे भी श्रेष्ठ कुछ है ?' [ सनत्कुमार—] 'स्मरसे भी श्रेष्ठ है ही।' [ नारद—] 'भगवान् मेरे प्रति उसका वर्णन करें' ॥२॥
| उक्तार्थमन्यत् ॥२॥ | शेष सबका अर्थ पूर्वोक्तके समान है ॥ २ ॥ |
|---|
इतिच्छान्दोग्योपनिषदि सप्तमाध्याये
त्रयोदशखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥१३॥