भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 81, कुल 978 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 81

चतुर्थ खण्ड

उद्गीथसंज्ञक ओंकारोपासनासे सम्बद्ध आख्यायिका

ओमित्येतदक्षरमुद्गीथमुपासीतोमिति ह्युद्गायति तस्योपव्याख्यानम् ॥ १ ॥

‘ॐ’ यह अक्षर उद्गीथ है—इस प्रकार इसकी उपासना करे। ‘ॐ’ ऐसा [ उच्चारण करके यज्ञमें उद्गाता ] उद्गान करता है। उस ( उद्गीथोपासना ) की ही व्याख्या की जाती है ॥ १ ॥

| ओमित्येतदित्यादिप्रकृतस्याक्षरस्य पुनरुपादानमुद्गीथाक्षराद्युपासनान्तरितत्वादन्यत्र प्रसङ्गो मा भूदित्येवमर्थम्। प्रकृतस्यैवाक्षरस्यामृताभयगुणविशिष्टस्योपासनं विधातव्यमित्यारम्भः।<br><br>ओमित्यादिव्याख्यातम् ॥१॥ | पूर्व-प्रस्तावित ओंकार अक्षरका ही ‘ओमित्येतत्’ इत्यादि वाक्यद्वारा इसलिये ग्रहण किया गया है जिससे बीचमें ‘उद्गीथ’ शब्दके अक्षरोंकी उपासनासे व्यवहित हो जानेके कारण अन्यत्र प्रसङ्ग न हो जाय। उस पूर्वप्रस्तावित अक्षरके ही अमृत और अभय गुणविशिष्ट स्वरूपकी उपासनाका विधान करना है—इसीके लिये [आगेका ग्रन्थ] आरम्भ किया जाता है। ओमित्यादि मन्त्रकी व्याख्या पहले की जा चुकी है ॥१॥ |

—: ० :—