छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
पृष्ठ 946, कुल 978 में से
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९४२ छान्दोग्योपनिषद् [ अध्याय ८
| धर्माणामपहन्तृ विनाशयित्रीत्ये- | और धर्मका हनन अर्थात् विनाश | | तत् । यदेवंलक्षणं श्येतं लिन्दु | करनेवाला है। जो ऐसे लक्षणों- | | | वाला श्येत लिन्दु—पिच्छिल स्त्री- | | पिच्छलं तन्माभिगां माभिग- | चिह्न है उसे प्राप्त न होऊँ उसमें | | | गमन न करूँ । 'माभिगाम् | | च्छेयम् । द्विर्वचनमत्यन्तानर्थ- | माभिगाम्' यह द्विरुक्ति उसका | | | अत्यन्त अनर्थहेतुत्व प्रदर्शित | | हेतुत्वप्रदर्शनार्थम् ॥ १ ॥ | करनेके लिये है ॥ १ ॥ |
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इतिच्छान्दोग्योपनिषद्यष्टमाध्याये चतुर्दशखण्ड- भाष्यं सम्पूर्णम् ॥ १४ ॥