छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
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| मंत्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृष्ठं | |
|---|---|---|---|---|---|
| अथ यदि मातृलोककामः | .... | ८ | २ | २ | ८२२ |
| अथ यदि यजुष्टो रिष्येत् | .... | ४ | १७ | ५ | ४३६ |
| अथ यदि सखिलोककामः | .... | ८ | २ | ५ | ८२३ |
| अथ यदि सामतो रिष्येत् | .... | ४ | १७ | ६ | ४३७ |
| अथ यदि स्त्रीलोककामः | .... | ८ | २ | ९ | ८२४ |
| अथ यदि स्वसृलोककामः | ... | ८ | २ | ४ | ८२२ |
| अथ यदु चैवाहिश्चोल्ब्यम् | ... | ४ | १५ | ५ | ४२३ |
| अथ यदूर्ध्वं मध्यन्दिनात् | ... | २ | ९ | ६ | १७८ |
| अथ यदूर्ध्वमपराह्नात् | ... | २ | ९ | ७ | १७९ |
| अथ यदेतदक्षणः शुक्लम् | ... | १ | ७ | ४ | ९९ |
| अथ यदेतदादित्यस्य | ... | १ | ६ | ५ | ९२ |
| अथ यदेवैतदादित्यस्य | .... | १ | ६ | ६ | ९३ |
| अथ यद्द्वितीयममृतम् | .... | ३ | ७ | १ | २६२ |
| अथ यद्धसति | ... | ३ | १७ | ३ | ३३१ |
| अथ यद्यज्ञ इत्याचक्षते | .... | ८ | ५ | १ | ८४२ |
| अथ यद्यन्नपानलोककामः | .... | ८ | २ | ७ | ८२३ |
| अथ यद्यप्येनानुत्क्रान्त० | .... | ७ | १५ | ३ | ७७१ |
| अथ यद्येनमूष्मसूपाल्भेत | ... | २ | २२ | ४ | २१२ |
| अथ या एता हृदयस्य | .... | ८ | ६ | १ | ८५४ |
| अथ यां चतुर्थीम् | ... | ५ | २२ | १ | ५६७ |
| अथ यां तृतीयाम् | .... | ५ | २१ | १ | ५६६ |
| अथ यां द्वितीयाम् | .... | ५ | २० | १ | ५६५ |
| अथ यां पञ्चमीम् | .... | ५ | २३ | १ | ५६८ |
| अथ यानि चतुश्चत्वारिँशत् | ... | ३ | १६ | ३ | ३२६ |
| अथ यान्यष्टाचत्वारिँशत् | ... | ३ | १६ | ५ | ३२७ |
| अथ ये चास्येह | .... | ८ | ३ | २ | ८२७ |
| अथ येऽस्य दक्षिणा रश्मयः | ... | ३ | २ | १ | २४९ |
| अथ येऽस्य प्रत्यञ्चः | ... | ३ | ३ | १ | २५१ |
| अथ येऽस्योदञ्चः | .... | ३ | ४ | १ | २५२ |
| अथ येऽस्योर्ध्वा रश्मयः | .... | ३ | ५ | १ | २५५ |
| अथ यो वेदेदं मन्वानीति | .... | ८ | १२ | ५ | ९३३ |
| अथ योऽस्य दक्षिणः | .... | ३ | १३ | २ | २९१ |