छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
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( ९६७ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| स यः स्मरं ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | १३ | २ | ७६३ |
| स यथा तत्र | .... ६ | १६ | ३ | ७०१ |
| स यथा शकुनिः सूत्रेण | .... ६ | ८ | २ | ६४६ |
| स यथोभयपाद्व्रजन्नथः | .... ४ | १६ | ५ | ४३२ |
| स यदवोचं प्राणम् | .... ३ | १५ | ४ | ३२० |
| स यदशिशिषति | .... ३ | १७ | १ | ३३० |
| स यदि पितरं वा मातरम् | .... ७ | १५ | २ | ७७० |
| स यदि पितृलोककामः | .... ८ | २ | १ | ८२१ |
| स यश्चित्तं ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | ५ | ३ | ७३६ |
| स यस्तेजो ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | ११ | २ | ७५७ |
| स यावदादित्य उत्तरतः | .... ३ | १० | ४ | २७१ |
| स यावदादित्यः | .... ३ | ६ | ४ | २६० |
| स यावदादित्यः पश्चात् | .... ३ | ९ | ४ | २६९ |
| स यावदादित्यः पुरस्तात् | .... ३ | ७ | ४ | २६३ |
| स यावदादित्यो दक्षिणतः | .... ३ | ८ | ४ | २६४ |
| स यो ध्यानं ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | ६ | २ | ७४१ |
| स यो नाम ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | १ | ५ | ७१९ |
| स योऽन्नं ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | ९ | २ | ७५१ |
| स योऽपो ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | १० | २ | ७५३ |
| स यो बलं ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | ८ | २ | ७४७ |
| स यो मनो ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | ३ | २ | ७२६ |
| स यो वाचं ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | २ | २ | ७२३ |
| स यो विज्ञानं ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | ७ | २ | ७४३ |
| सर्वं खल्विदं ब्रह्म | .... ३ | १४ | १ | ३०३ |
| सर्वकर्मा सर्वकामः | .... ३ | १४ | ४ | ३१२ |
| सर्वास्वप्सु पञ्चविधम् | .... २ | ४ | १ | १६१ |
| सर्वे स्वरा इन्द्रस्यात्मानः | .... २ | २२ | ३ | २१० |
| सर्वे स्वरा घोषवन्तः | .... २ | २२ | ५ | २१२ |
| स वा एष आत्मा हृदि | .... ८ | ३ | ३ | ८२९ |
| स समित्पाणिः पुनरेयाय | .... ८ | १० | ३ | ८९५ |
| ” ” | .... ८ | ११ | २ | ९०३ |