भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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२७८ चरकसंहिता [अ० २५ स्रष्टा त्वमितसंकल्पो ब्रह्मापत्यं प्रजापतिः । चेतनाचेतनस्यास्य जगतः सुखदुःखयोः ॥ २३ ॥ कांकायन ऋषि बोले—यह ठीक नहीं। यदि स्वभाव से ही रोग और पुरुषों की सिद्धि और असिद्धि होती हो, तो आरम्भ अर्थात् लोक और शास्त्र में प्रसिद्ध यज्ञ, कृषि, पढ़ाना, पढ़ना आदि कार्य निष्प्रयोजन होजायें । इस सुख- दुःख को बनाने वाला एवं चेतन तथा अचेतन जगत् का कर्त्ता अनन्त संकल्प वाला, ब्रह्मा का पुत्र प्रजापति है ॥ २२-२३ ॥ तन्नेति भिक्षुरात्रेयो नह्यपत्यं प्रजापतिः । प्रजाहितैषी सततं दुःखैर्युञ्ज्यादसाधुवत् ॥ २४ ॥ कालजस्त्वेव पुरुषः कालजास्तस्य चाऽऽमयाः । जगत्कालवशं सर्वं कालः सर्वत्र कारणम् ॥ २५ ॥ भिक्षुरात्रेय बोले—यह ठीक नहीं है । यह संसार प्रजापति से (पुत्र रूपेण) उत्पन्न नहीं हुआ । क्योंकि प्रजा की मंगलकामना करने वाला प्रजापति, संतान से द्वेष करने वाले की भांति किस प्रकार से दुःखों को देता, अपनी संतान को दुःखी करता, वास्तव में पुरुष काल से उत्पन्न होता है और रोग भी काल से ही उत्पन्न होते हैं । सम्पूर्ण जगत् काल के वश में है और सब जगह काल ही कारण है ॥ २४-२५ ॥ तथर्षीणां विवदतामुवाचेदं पुनर्वसुः । मैवं वोचत तत्त्वं हि दुष्प्रापं पक्षसंश्रयात् ॥ २६ ॥ वादान् सप्रतिवादान् हि वदन्तो निश्चितानिव । पक्षान्तं नैव गच्छन्ति तिलपीडकवद् गतौ ॥ २७ ॥ मुक्त्वैवं वादसंघट्टमध्यात्ममनुचिन्त्यताम् । नाविधूततमःस्कन्धे ज्ञेये ज्ञानं प्रवर्तते ॥ २८ ॥ येषामेव हि भावानां संपत्संजनयेन्नरम् । तेषामेव विपद्व्याधीन् विविधान् समुदीरयेत् ॥२६॥ इस प्रकार ऋषिमण्डल में विवाद चलते हुए देख कर पुनर्वसु ऋषि बोले कि इस प्रकार एक पक्ष को लेकर वादविवाद करते जाओगे तो किसी निश्चित तत्त्व को नहीं पहुंच सकोगे । जिस प्रकार तैल के कोल्हू (चरखी) पर बैठा हुआ मनुष्य चारों ओर अनन्त काल तक घूमता रहता है, परन्तु किसी निश्चित दिशा या स्थान पर नहीं पहुंचता । इस लिये इस वादविवाद को छोड़ कर मत- लब की बात सोचो । अन्धकारसमूह को नष्ट किये बिना ज्ञातव्य विषय में ज्ञान