भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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३८२ चरकसंहिता [अ० २५ प्रकृष्टतमा भवन्ति, माषाः शमीधान्यानां, वर्षानदेयमुदकानां, औद्धरं लवणानां, सर्षपशाकं शाकानां, गोमांसं मृगमांसानां, काणकपोतः पक्षिणां, भेको बिलेशयानां, चिलिचिमो मत्स्यानां, आविकं सर्पिः, अविक्षीरं क्षीराणां, कुसुम्भस्नेहः स्थावरस्नेहानां, महिषवसा आनूपमृग- वसानां, कुम्भीरवसा मत्स्यवसानां, काकमद्गुवसा जलचरविहङ्गव- सानां, चटकवसा विष्किरशकुनिवसानां, हस्तिमेदः शाखादमदसां, लिकुचं फलानां, आलुकं कन्दानां, फाणितमिक्षुविकाराणाम्, -इति प्रकृ- त्येव अहिततमानामाहारविकाराणां प्रकृष्टतमानि द्रव्याणि व्याख्यातानि भवन्ति - इति हिताहितावयवो व्याख्यात आहारविकाराणाम् ॥ ३७ ॥ अब इसके अनन्तर अहित पदार्थों का उपदेश करेंगे - यवक ( जई, जत्री ) शूक-धान्यों में सबसे अपथ्य एवं अति निन्दित है। माष ( उड़द ) शमी-धान्यों में, बरसात में नदियों का पानी सब पानियों में, ऊसर देश मे उत्पन्न नमक सब नमकों में, सरसों का शाक सब शाकों में, गाय का मांस सब पशुओं के मांसों में, छोटा कबूतर सब पक्षियों में, मेंढक बिल में रहने वालों में, चिलचिम मत्स्य सब मछलियों में, भेड़ का घी सब घीयों में, भेड़ का दूध सब दूधों में, कुसुम्भ का तेल सब स्थावर तेलों में, भैंस की चर्बी सब जलीय देश के पशुओं की चर्वियों में, कुम्भीर मछली की वसा सब मछलियों की वसा में, पानी के कौवे (पनकव्वा) की चर्बी सब जलचर पक्षियों में, कारण्डव (पनडुब्बी हंसभेद ) की चर्बी सब जलचारी पक्षियों की चर्वियों में, हाथी की चर्बी शाखा खानेवाले सब पशुओं में, लिकुच, ( बड़हल, ल्हो ) सब प्रकार के फलों में, आलू सब कन्दों में, राब गन्ने से बने सब विकारों में, चिड़िया की चर्बी बिखेर कर खाने वाले सब पक्षियों की चर्वियों में निन्दित हैं। ये भोज्य पदार्थों मे स्वभाव से ही हितकारी एवं निन्दनीय द्रव्य कहे गये हैं ॥ ३७ ॥ अतो भूयः कर्मौषधानां च प्राधान्यतः सानुबन्धानि च द्रव्याण्यनु- व्याख्यास्यामः । तद्यथा-- अन्नं वृत्तिकराणां श्रेष्ठं, उदकमाश्वासकराणां, सुरा श्रमहराणां, क्षीरं जीवनीयानां, मांसं बृंहणीयानां, रसस्तर्पणीयानां, लवणमन्नद्रव्यरुचिकराणां, अम्लं हृद्यानां, कुक्कुटो बल्यानां, नक्ररेतो वृष्याणां, मधु श्लेष्मपित्तप्रशमनानां, सर्पिर्वातपित्तप्रशमनानां, तैलं वातश्लेष्मप्रशमनानां, वमनं श्लेष्महराणां, विरेचनं पित्तहराणां, बस्ति- -र्वातहराणां, स्वेदो मार्दवकराणां, व्यायामः स्थैर्यकराणां, क्षारः पुंस्त्वोप- घातिनां, तिन्दुकमन्नद्रव्यरुचिकराणां, आमं कपित्थमकण्ठ्यानां, आ-