भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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२६ चरकसंहिता [ अ० १ ओषधीर्नामरूपाभ्यां जानते ह्यजपा वने । अविपाश्चैव गोपाश्च ये चान्ये वनवासिनः ॥ १२० ॥ बकरियां चराने वाले, भेंड़े चराने वाले, गौवें चराने वाले और अन्य तपस्वी या भील आदि जो कि जंगल में रहते हैं ये लोग ओषधियों को नाम रूप और आकृति से पहिचानते हैं ॥ १२० ॥ न नामज्ञानमात्रेण रूपज्ञानेन वा पुनः । ओषधीनां परां प्राप्तिं कश्चिद्वेदितुमर्हति ॥ १२१ ॥ योगवित्त्वामरूपज्ञस्तासां तत्त्वविदुच्यते । किं पुनर्यो विजानीयादोषधीः सर्वथा भिषक् ॥ १२२ ॥ योगमासां तु यो विद्याद्देशकालोपपादितम् । पुरुषं पुरुषं वीक्ष्य स विज्ञेयो भिषक्तमः ॥ १२३ ॥ ओषधियों के नाम जान लेने मात्र से, अथवा रूप से पहिचान लेने से भी कोई ओषधि के सम्यक् प्रयोग को नहीं जान सकता । इसीलिये शास्त्र में इनका वर्णन किया जाता है । जो वैद्य ओषधियों को नाम, रूप, और उनके योग और प्रयोगों सहित जानता है, वह तो तत्त्ववित् है ही, जो वैद्य ओषधियों को सभी प्रकार से समझता है; उसके लिये कहना ही क्या ? और जो व्यक्ति प्रत्येक पुरुष के बल, शरीर, आहार, सार, सात्म्य, सत्त्व प्रकृति और वयस का विचार करके देश, काल, मात्रा के अनुसार ओषधि को जानता है वह वैद्यों में श्रेष्ठ है ॥१२१-१२३॥ न जानी हुई औषधियों से हानियाँ- यथा विषं यथा शस्त्रं यथाग्निरशनिर्यथा । तथौषधमविज्ञातं विज्ञातममृतं यथा ॥ १२४ ॥ औषधं ह्यनभिज्ञातं नामरूपगुणैस्त्रिभिः । विज्ञातमपि दुर्युक्तमनर्थायोपपद्यते ॥ १२५ ॥ जिस प्रकार न जाना हुआ ( मूढ़ आदमी से प्रयुक्त किया हुआ ) विष, जिस प्रकार शस्त्र, जिस प्रकार अग्नि और जिस प्रकार अशनि ( वज्र ) या ( बिजली ) मृत्यु के कारण बनते हैं, उसी प्रकार नाम रूप गुण से न जानी हुई औषधि भी मृत्यु का कारण हो सकता है और नामरूप और गुण से जानी हुई औषधि अमृत के समान है । नाम, रूप एवं गुण से न