चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें[Header: ४५८ चरकसंहिता [ अ० ४ ]
बैठे रहने से, अथवा कफ, मेद व मूत्र को बढ़ाने वाला जो भी कारण होता है वे सब प्रमेहों के विशेष कारण हैं ॥६॥ बहुद्रवः श्लेष्मा दोषविशेषः ॥ ७ ॥ बह्वबद्धं मेदोमांसं शरीरजक्लेदः शुक्रं शोणितं च वसा मज्जा लसीका रसश्चौजःसंख्यात इति दूष्यविशेषाः ॥ ८॥ कफप्रमेह के दूष्य — बहुत तरल ( द्रव ) कफ इसमें दोष होता है, बहुत अबद्ध ( असंहत अर्थात् ढीला-शिथिल ) मेद मांस, शरीरजन्य क्लेद, शुक्र, शोणित, वसा, मज्जा, लसीका, रस और ओज ये दूष्य विशेष हैं अर्थात् इनमें ही दोष अपना बुरा प्रभाव उत्पन्न करता है१ ॥८॥ त्रयाणामेषां निदानादिविशेषाणां सन्निपाते क्षिप्रं श्लेष्मा प्रको- पमापद्यते प्रागभिभूयस्त्वत् , स प्रकुपितः क्षिप्रमेव शरीरे विसृतिं लभते, शरीरशैथिल्यात्स विसर्पञ्छरीरे मेदसैवादितो मिश्रीभावं गच्छति, मेदसश्चैव बह्वबद्धत्वान्मेदसश्च गुणानां गुणैः समानगुणभूयि- ष्ठत्वात्स मेदसा मिश्रीभावं गच्छन् दूषयत्येनद्विकृतत्वात् , स विकृतो दुष्टेन मेदसोपहितः शरीरक्लेदमांसाभ्यां संसर्गं गच्छति, क्लेदमांसयोर- तिप्रमाणाभिवृद्धत्वात् स मांसे मांसप्रदोषात्पूतिमांसपिडकाः शरा- विकाकच्छपिकाद्याः संजनयति, अप्रकृतिभूतत्वात्, शरीरक्लेदं पुन- र्दूषयन्मूत्रत्वेन परिणमयति । मूत्रवहानां च स्रोतसां वङ्क्षणबस्ति- प्रभवाणां मेदःक्लेदोपहितानि गुरूणि मुखान्यासाद्य प्रतिरुध्यते; ततस्तेषां स्थैर्यमसाध्यतां वा जनयति, प्रकृतिविकृतिभूतत्वात् ॥ ६॥ कफप्रमेह की सम्प्राप्ति—निदान, दोष और दूष्य इन तीनों के मिलने से कफ शीघ्र कुपित हो जाता है। क्योंकि रोग उत्पत्तिकाल में कफ अधिक बढ़ा होता है। इस प्रकार से कुपित कफ जल्दी ही शरीर में फैल जाता है। शरीर के शिथिल होने से फैलता हुआ यह कफ सबसे प्रथम शरीर में मेद के साथ १. प्रमेह में सब से प्रथम कफ का ही बिगाड़ होता है । इसलिये यह तो दोष है, और सप्तधातु, रस, रक्त, मांस आदि ये इससे दूषित होते हैं, इसलिये ये दूष्य हैं। इस अवस्था में जिस अपर ओज का परिमाण आधा अञ्जलि कहा है, वह ओज भाग विकृत होता है । क्लेद रक्त का तरल भाग है जिसके दूषित होने से मधुमेह रोगी के व्रण शीघ्र अच्छे नहीं होते। शरीर में त्वचा के नीचे रहने वाला पतला श्वेत, चिकना पदार्थ है जो की रक्षा करता है। ये सब दूष्य हैं।