भारतकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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विषय-सूची शारीरस्थानम्

प्रथमोऽध्यायः (पृ० १-२८) कतिधापुरुषीयम्-पुरुष के भेद, उसकी प्रधान कारणता, पुरुष की उत्पत्ति, पुरुष की नित्यता और अनि- त्यता, प्रकृति उसके विकार, पुरुष और प्रकृति के लक्षण आत्मा के जन्म, उसको सुख दुःख, उसकी अदृश्यता, उसकी साक्षिता आदि विषयक संशय, वेदना के कारण आदि अग्निवेश के २३ प्रश्न। महर्षि आत्रेय का समाधान। 'पुरुष' शब्दवाच्य पदार्थ। मन का लक्षण, मन के विषय, मन के कर्म, बुद्धि की उत्पत्ति। इन्द्रियाँ। पंचमहा- भूतों के लक्षण, ग्राह्य विषय। अव्यक्त आत्मा। पुरुष आत्मा, राशिसंज्ञक पुरुष। आत्मा का प्रतिपादन। नास्तिक मत, नास्तिक मत मे दोष। आत्मा के विषय प्रतिपादन। व्यक्त, अव्यक्त। आभूत प्रकृति। १६ विकार वर्ग क्षेत्र (शरीर) अव्यक्त से बुद्धि सत्त्वादि की उत्पत्ति। जन्म। पुरुष के लक्षण, पञ्चत्व, आत्मा कर्त्ता आत्मा विभु। आत्मा अनादि, साक्षी। उत्तम चिकित्सा का प्रयोजन। उपधा। दुःख के कारण।

प्रज्ञापराध। कालज रोग। कर्मफलज असाध्य रोग। गन्धादि रस, शब्द, स्पर्श आदिका, योग, अयोग, अतियोग, मिथ्यायोग। उनसे उत्पन्न ऐन्द्रियिक रोग। सुख, आरोग्य का कारण समान योग। सुख दुःख का कारण। वेदनाओं का प्रवर्त्तक मानस योग। वेदनाओं का आश्रय। योग और मोक्ष-वेदना की निवृत्ति। योगियो का आठ प्रकार का ऐश्वर्य, मोक्ष। मोक्ष के उपाय। स्मृति, स्मृति उत्पत्ति के आठ कारण। योग- मार्ग। द्वितीयोऽध्यायः (पृ० २८-३६) अतुल्यगोत्रीयम्-गर्भ की उत्पत्ति विषयक प्रश्न। गर्भोत्पत्ति विषयक उत्तर। गर्भ विषयक पांच प्रश्न, उनके उत्तर, पूर्ण शरीर होने का कारण, देर से गर्भ-धारण के कारण, गर्भ के असत् रूप, भूतों द्वारा गर्भ हरण का निरा- करण। पुत्र, पुत्री और नपुंसक की उत्पत्ति, अनेक सन्तानो की एक साथ उत्पत्ति, प्रसव काल मे विलम्ब, युगल सन्तान मे एक की विशेष वृद्धि विषयक आठ प्रश्न। उनके समाधान,