चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)
Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation
महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपा० ३ ] चिकित्सितस्थानम् २२३ कोई भी रसायन ग्राम्य ( नगर में रहने वाले ) पुरुषों तथा काम-धन्धे में फंसे हुए तथा ब्रह्मचर्य आदि सयम का पालन न करनेवाले पुरुषों में फलवती नहीं होती । इसलिये इनसे पृथक् होकर एकाग्र चित्त से रसायन-विधि करनी चाहिये। सहस्र वर्ष की आयु प्रदान करने वाले और जरा तथा रोग को दूर ,करनेवाले तथा बुद्धि और इन्द्रिय बल को देनेवाले इस आमलक रसायन का ब्रह्मा ने आविष्कार किया था ॥ ७-८ ॥ संवत्सरं पयोवृत्तिर्गवां मध्ये वसेत्सदा । सावित्रीं मनसा ध्यायन् ब्रह्मचारी जितेन्द्रियः ॥ ९ ॥ संवत्सरान्ते पौषीं वा माघीं वा फाल्गुनीं तिथिम् । त्र्यहोपवासी शुद्धश्च प्रविश्यामलकीवनम् ॥ १० ॥ बृहत्फलाढ्यमारुह्य द्रुमं शाखागतं फलम् । गृहीत्वा पाणिना तिष्ठेज्जपन् ब्रह्मामृतागमात् ॥ ११ ॥ तदा ह्यवश्यममृतं वसत्यामलके क्षणम् । शर्करामधुकल्पानि स्नेहवन्ति मृदूनि च ॥ १२ ॥ भवन्त्यमृतसंयोगात्तानि यावन्ति भक्षयेत् । जीवेद्वर्षसहस्राणि तावन्त्यागतयौवनः ॥ १३ ॥ सौहित्यमेषां गत्वा तु भवत्यमरसन्निभः । स्वयं चास्योपतिष्ठन्ते श्रीर्वेदा वाक् च रूपिणी ॥ १४ ॥ इति केवलामलकं रसायनम् । केवलामलक रसायन—एक वर्ष तक केवल दूध पर निर्वाह रखकर गायों के बीच में वास करे । वहां पर ब्रह्मचर्य्य का पालन करते हुए मन में सावित्री का ध्यान करे । एक साल के पीछे पौष या माघ अथवा फाल्गुन की किसी शुभ तिथि में आंवले के जंगल में पहुंचे । वहां पर जाने से पूर्व तीन दिन उपवास करे । फिर शुद्ध होकर वन में घुसे । वहां पर आंवले से लदे बड़े वृक्ष पर चढ़कर हाथ से फल को पकड़ कर अमृत के आने तक ब्रह्म, 'ओङ्कार' का जप करता रहे । इस प्रकार जप करने से क्षण भर के लिये आंवले में अमृतत्व आ जाता है । अमृत के आने से आंवले शर्करा और मधु के समान मीठे, स्नेहवाले, कोमल हो जाते हैं, इनको खावे। वह जितने भी आंवले खायेगा उतने हजार वर्षों तक युवारहकर जीवंत रहेगा । यदि भरपेट तृप्त होकर खाये तो अमर हो जाये, बहुत दीर्घायु हो । कान्ति वेदवाणी, लक्ष्मी, सरस्वती स्वयं इसके आगे आकर उपस्थित हो जाती है।९-१४।