भारतकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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पृष्ठ 250

२३६ चरकसंहिता [ अ० १ शतावरी विदारी जीवन्ती पुनर्नवा नागबला स्थिरा वचा छत्राऽति- च्छत्रा मेदा महामेदा जीवनीयाश्चान्याः पयसा प्रयुक्ताः षण्मासा- त्परमायुर्वयश्च तरुणमनामयत्वं स्वरवर्णसंपदमुपचयं मेधां स्मृतिमु- त्तमबलमिष्टांश्चापरान् भावानावहन्ति सिद्धाः ॥ ६ ॥ इतीन्द्रोक्तं रसायनम्। इन्द्रोक्त रसायन—इसके पीछे इन्द्र ने ऋषियों को आयुर्वेदमृत का उपदेश किया। इस सम्पूर्ण आयुर्वेद का पालन करना चाहिये। रसायन सेवन करने का. यह पुण्य, कल्याणकारी समय है। इस समय हिमालय में उत्पन्न होने वाली सब दिव्य औषधियां वीर्य से परिपूर्ण हैं। जैसे—ऐन्द्री, ब्राह्मी, पयस्या (क्षीर-विदारी), क्षीरपुष्पी, श्रावणी (गोरखमुण्डी), महाश्रावणी, शतावरी, विदारीकन्द, जीवन्ती, नागबला, स्थिरा (शालपर्णी), वचा, छत्रा, अतिछत्रा, मेदा, महामेदा, जीवनीय गुण की अन्य ओषधियां (काकोली, क्षीर- काकोली, जीवक, ऋषभक, मुलहठी, मुद्गपर्णी, माषपर्णी), इनको दूध के साथ छः मास तक यथाविधि प्रयोग करने पर दीर्घ आयु, तरुण वय, नीरोगता, स्वर और वर्ण की शुद्धता, वृद्धि, मेधा, स्मृति, उत्तम बल तथा अभिलषित बातों की प्राप्ति होती है* ॥ ६ ॥ ब्रह्मसुवर्चलानामौषधिर्या हिरण्यक्षीरा पुष्कर-सदृश-पत्रा, आदि- त्यपर्णी नामौषधिर्या सूर्यकान्तेति विज्ञायते सुवर्ण-वर्ण क्षीरा सूर्यमण्ड- लाकारपुष्पा च, नारी नामौषधिरश्वबलेति विज्ञायते या बल्वजसदृश- पत्रा, काष्ठगोधा नामौषधिर्गोधाकारा, सर्पा नामौषधिः सर्पाकारा,

  • कविराज श्री गंगाधर सेन ने 'ऐन्द्री' का अर्थ इन्द्रायण किया है। छत्रा और अतिछत्रा का अर्थ डल्हण ने 'द्रोणपुष्पी द्वय' किया है। वैसे सोया और सौंफ भी होता है। श्रावणी—अरत्निमात्रस्तृपका पत्रैर्द्वयंगुलसम्मितैः । पुष्पैर्नीलोत्पलाकारैः फलैश्चाञ्जनसन्निमैः ॥ श्रावणी महती ज्ञेया कनकाभा पयस्विनी। श्रावणी पाण्डुराभासा महाभावानिलक्षणा ॥ श्रावणी का एक हाथ भर का पौधा और दो दो अंगुल के पत्ते होते हैं। नील कमल के से आकार के फूल और अञ्जन के समान काले फल होते हैं। महाश्रावणी स्वर्ग के समान पीले रंग के रस की होती है और श्रावणी का रस श्वेत होता है।