भारतकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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पृष्ठ 292

२७८ चरकसंहिता [ अ० ३ संततः सततोऽन्येद्युस्तृतीयकचतुर्थकौ ॥ ३४ ॥ पुनराश्रयभेदेन धातूनां सप्तधा मतः । भिन्नः कारणभेदेन पुनरष्टविधो ज्वर ॥ ३५ ॥ विधि-भेद से ज्वर दो प्रकार का है । एक शारीर ज्वर और दूसरा मानस ज्वर । फिर भी ज्वर दो प्रकार का देखा जाता है । जैसे-सौम्य और आग्नेय । वेग के अभिप्राय से भी दो प्रकार का है । अन्तर्वेग और बहिर्वेम । प्राकृत और वैकृत । साध्य और असाध्य भेद से भी ज्वर दो प्रकार का है । दोष और काल के बल-अबल के भेद से ज्वर पाच प्रकार का देखा गया है । जैसे-सन्तत, सतत, अन्येद्युष्क, तृतीयक और चतुर्थक । रस आदि सात धातुओं के भेद से ज्वर सात प्रकार का है । जैसे-रसज, रक्तज, मासज, मेदज, अस्थिज, मज्जाज और शुक्रज । कारण भेद से ज्वर आठ प्रकार का है । जैसे-वातज, पित्तज, कफज, पित्त-कफज, वात-कफज, वात-पित्तज, और सन्निपातज तथा आगन्तुज ॥३२-३५ ॥ शारीरो जायते पूर्वं देहे मनसि मानसः । वैचित्त्यमरतिर्ग्लानिर्मनसस्तापलक्षणम् ॥ ३६ ॥ इन्द्रियाणां च वैकृत्यं देहसन्तापलक्षणम् । वातपित्तात्मकः शीतमुष्णं वातकफात्मकः ॥ ३७ ॥ इच्छत्युभयमेतत्तु ज्वरो व्यामिश्रलक्षणः । योगवाही परं वायु संयोगादुभयार्थकृत् ॥ ३८ ॥ दाहकृत्तेजसा युक्तः शीतकृत्सोमसंश्रयात् । शारीरिक ज्वर वातादि दोष के कारण प्रथम शरीर में उत्पन्न हो जाता है । पीछे से मन आक्रान्त होता है । परन्तु मन में उत्पन्न होने वाला ज्वर प्रथम मन में होता है, पीछे से शरीर में आता है । मानस ज्वर के लक्षण-चित्त का विक्षिप्त होना, बेचैनी, ग्लानि का होना है । शारीरिक ज्वर में इन्द्रियों में विकृति उत्पन्न हो जाती है (अभिलषित विषय भी तब अच्छे नहीं लगते) । वात- पित्तजन्य ज्वर में उष्णता की चाह करता है । मिश्रित लक्षणों वाले ज्वर में शीत और उष्ण दोनों की चाह करता है । वायु अतियोगवाही है—सयोग के कारण दोनों कार्य करता है । पित्त के साथ मिलने से उष्णिमा, कफ के साथ मिलने से शीतलता को उत्पन्न करता है ॥ ३६-३८ ॥ अन्तर्दाहोऽधिकस्तृष्णा प्रलापः श्वसनं भ्रमः ॥ ३९ ॥ सन्धयस्थिशूलमस्वेदो दोषवच्र्चोविनिग्रहः ।