चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)
Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation
महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
पृष्ठ 44, कुल 616 में से
संदर्भ में पढ़ेंअ० २ ] शारीरस्थानम् २६ आधान करता है, बुद्धिमान् पुरुष इस वस्तु को 'शुक्र' कहते हैं। यह शुक्र उत्तम वायु, अग्नि, पृथ्वी और जल इन चार भूतो के गुणों से युक्त होता है। ये ही चार इसके चार १पाद हैं। यह शुक्र मधुर आदि छः रसों वाले आहार- रस से उत्पन्न होता है। [ मधुर को शुक्रजनक और अम्ल रस को शुक्रविघातक कहा है उसका तात्पर्य अधिक उपयोग करने से है। वैसे छहों रसों से उत्पन्न वीर्य ही विशुद्ध शुक्र होता है] ॥४॥ संपूर्णदेहः समये सुखं च गर्भः कथं केन च जायते स्त्री । गर्भं चिराद् विन्दति सप्रजाऽपि भूत्वाऽथवा नश्यति केन गर्भः ॥५॥ प्रश्न—( १) गर्भ किस प्रकार से सम्पूर्ण शरीर वाला होता और ( २ ) किस प्रकार से और किस कारण से ठीक समय पर उत्पन्न होता है ? ( ३ ) किस प्रकार से गर्भ उत्पन्न होता और सुख से उत्पन्न होता है ? ( ४ ) स्त्री वन्ध्या न होते हुए भी किस कारण से देर में गर्भ धारण करती है ? ( ५ ) और गर्भ रह कर फिर किस कारण से नष्ट होना सम्भव है ॥ ५ ॥ शुक्रासृगात्माशयकालसंपद् यस्योपचारश्च हितैस्तथाऽर्थैः । गर्भश्च काले च सुखी सुखं च संजायते संपरिपूर्णदेहः ॥ ६ ॥ उत्तर—जिस गर्भ के बनने में शुक्र, आर्त्तव, आत्मा, गर्भाशय और काल ये गर्भकारक भाव (पदार्थ) उत्तम गुणवाले अविकृत हों और जिसका पालन पोषण भी उत्तम हितकारक अन्नो वा पदार्थों द्वारा हो २ वह गर्भ सम्पूर्ण शरीर वाला होकर सुखी, सब प्रकार के रोगों से मुक्त और ठीक समय पर उत्पन्न होता है। [ पुरुष के शुक्र और माता के रज तथा गर्भाशय का उष्ण होना यह उत्तम गुण है, शुक्र और रज के योग होने पर भी आत्मा पूर्व जन्म के उत्तम कर्मों से युक्त हो, काल, अतिगरमी, अति सरदी आदि तीक्ष्णस्वभाव का न हो, गर्भ के प्रसव का ठीक काल नवम मास के अनन्तर दसवे मास के भीतर २ है। गर्भ सुखी अर्थात् किसी रोग से पीड़ित न हो और १ यद्यपि आगे आकाश का भी गर्भोत्पत्ति में कारण कहेंगे, तथापि यहा पर आकाश के अक्रिय होने स इसको नहीं गिना। क्योंकि वायु आदि चारो भूत पुरुष के शरीर से निकल कर क्रियावान् की तरह गर्भाशय में जाते हैं, आकाश नहीं जाता । २ कही पर अन्न के स्थान पर 'अर्थ' पाठ है । यहा पर 'माता के सात्म्य विषयों के सेवन से' ऐसा अर्थ करना चाहिये ।