भारतकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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६३० चरकसंहिता [ अ० १५

के धातु क्लिन्न (आर्द्र) हो जाते है। इन अपक्व और क्लिन्न स्रोतो मे जो अन्य आहार आता है, वह भी दूषित हो जाता है। जिस प्रकार गरम दूध यदि विदग्ध (विकृत) हो जाये तो उसमे अन्य जो भी दूध मिलाया जाय वह भी दूषित हो जाता है। इसलिये बुद्धिमान् मनुष्य को चाहिये कि बल और आयुष्य की रक्षा करते हुए रात्रि के भोजन के परिपाक न होने पर अन्य भोजन न करे। रात्रि का भोजन जीर्ण होने पर ही भोजन करना चाहिये ॥२३८ २४४॥ तत्र श्लोकाः—अन्तरग्निगुणा देहं यथा धारयते च सः यथाऽन्नं पच्यते याश्च यथाऽऽहारः करोत्यपि ॥ २४५ ॥ येऽग्नयो यांश्च पुष्यन्ति यावन्तो ये पचन्ति यान् । रसादीनां क्रमोत्पत्तिर्मलानां तेभ्य एव च ॥ २४६ ॥ वृष्याणामाशुवृद्धेतुर्धातुकालोद्भवक्रमः । रोगैकदेशकृद्धेतुरन्तरग्निर्यथाऽधिकः ॥ २४७ ॥ सन्दूषयति यथा दुष्टो यान् रोगाञ्जनयत्यपि । ग्रहणी या समासाच्च ग्रहणीदोषलक्षणम् ॥ २४८ ॥ पूर्वरूपं पृथक् चैव व्यञ्जनं सचिकित्सितम् । चतुर्विधस्य निर्दिष्टा तथा चावस्थिकी क्रिया ॥ २४९ ॥ जायते च यथाऽत्यग्निर्यच्च तस्य चिकित्सितम् । उक्तवानिह तत्सर्वं ग्रहणीदोषके मुनिः ॥ २५० ॥ उपसहार—भीतरी अग्नि के गुण शरीर को किस प्रकार धारण करते हैं, अन्न का परिपाक किस प्रकार होता है, किस प्रकार आहार किन २ गुणों को करता है, कितने अग्नि हैं, ये किनका पोषण करते हैं, किन को ये पचाते है, रसादि धातुओं की क्रमश उत्पत्ति, इन धातुओं से मलादि की उत्पत्ति, तृष्णा- ओ का कारण, धातुओ की उत्पत्ति का काल, उनका क्रम, एक देश मे रोगो- त्पत्तिका कारण, अधिक अन्तराग्नि का कारण, दूषित अग्नि से उत्पन्न रोग, ग्रहणी और ग्रहणी दोष के लक्षण, उनके पूर्वरूप, पृथक् २ लक्षण, चिकित्सा अव- स्थानुसारी चिकित्सा, अत्यग्नि की उत्पत्ति और चिकित्सा इस ग्रहणी-रोग-चिकित्सित अध्याय मे इन सब विषयों का मुनि आत्रेय ने उपदेश कर दिया है॥२४५-२५०॥ इत्यग्निवेशकृते तन्त्रे चरकप्रतिसंस्कृते चिकित्सितस्थाने ग्रहणीरोगचिकित्सित नाम पञ्चदशोऽध्याय ॥ १५ ॥


मुद्रक—प० बैकुण्ठनाथ भार्गव, आनन्द सागर प्रेस, गायघाट, बनारस ।