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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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शम्भूराजा की बात सुनते ही कवि कलश उठकर खड़े हो गये। राजा के सामने झुकते हुए विनम्रता से बोले, "महाराज, आपके मुकुट के मोतियों में हम कोई कमी नहीं आने देंगे। हम मरते दम तक साथ रहेंगे।" हिन्दवी स्वराज्य के दूसरे छत्रपति के राज्याभिषेक-समारोह पूरी गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। गढ़ पर एक लाख से अधिक लोग उपस्थित थे। नीचे उतरने के लिए केवल एक सँकरा रास्ता था। इसलिए भीड़ अधिक हो गयी। होली के मैदान पर भी दान प्राप्त करने के लिए याचकों में खूब हो-हल्ला हुआ। विशेष रूप से तैयार किया गया लकड़ी का चबूतरा भी टूट गया। हजारों याचक एक साथ टूट पड़े। ठेलमठेल और अनियन्त्रित भीड़ में दम घुटने से सौ दो सौ याचक मृत्युमुखी हो गये। भीड़ की असीम बाढ़ के कारण लौटते समय खूब कसा कमी हुई। कुछ अफवाहें भी फैलीं। जिन्हें दान नहीं मिल पाया वे छटपटाकर बड़े-बड़े शाप दे रहे थे। मार्ग में कवि कलश और उनकी मातृभूमि कन्नौज को लांछित किया जा रहा था। एक शास्त्रीजी बड़े ताव से बता रहे थे—"समझ में आया तुम लोगों की? यह सारी गड़बड़, यह सारी नरबलि उस दुष्ट कलश की करामात है। पूरे चौदह सौ मनुष्य और चार हजार भेड़ें काटी हैं उसने। ऐसा उस नराधम ने किया है।" "किन्तु किस लिए?" "ऐसे बच्चों जैसा प्रश्न क्या पूछते हो? उस कलुष के प्रियतम शम्भूराजा सिंहासनाधीश हो गये न? इसीलिए इस शाक्तपन्थी चांडाला का यह कारनामा हुआ है। वह मानता है कि जितनी नर बलि होगी, जितनी भेड़ों के प्राण जाएँगे उतने ही शम्भूराजा के शत्रु नष्ट होंगे।" लोगों ने अनियन्त्रित भीड़ और अति उत्साह के कारण प्राण गँवाए थे और सारा दोष कवि कलश के माथे मढ़ा जा रहा था। चार शम्भूराजा के निजी कक्ष में कुछ समीपी लोग एकत्र हुए थे। मध्यरात्रि में आवभगति हो रही थी। उनमें बालाजी चिटणीस म्हालोजी घोडपड़े कोंडाजी, फर्जन्द जैसे बुजुर्गों सहित कवि कलश कृष्णाजी कंक, निलोपन्त पेशवा जैसे तरुण भी सम्भाजी :: 235