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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 272, कुल 793 में से

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पृष्ठ 272

हँसते हुए कहा— “महाराज, आप में और शहजादा अकबर में बहुत-सी समानताएँ हैं।” “मतलब ?” “आप दोनों की उम्र एक ही है। दोनों चौबीस वर्ष के। शहजादा अकबर औरंगजेब की चौथी सन्तान है और आप भी शिवाजी महाराज की चौथी सन्तति हैं। उस शहजादे की माँ तो उसे जन्म देकर दो महीने के अन्दर ही अल्लाह को प्यारी हो गयी, किन्तु आपकी माताजी भी आपके दो वर्ष के होने पर अचानक स्वर्ग सिधार गयीं। इतना ही नहीं—कृपया क्षमा करें। साफ बोलूँ तो बुरा न मानें— शहजादे ने अपने पिता से बगावत की है और आप अपने पिताजी से बगावत करके दिलेरखान से जाकर मिल गये थे।” इन समानताओं को सुनते हुए शम्भूराजा चकित रह गये। उनका बड़ा मनोरंजन भी हुआ। राजा को प्रसन्नचित्त देखकर कविराज धीरे-से बोले— “राजन, राज्यशास्त्र के कुछ अलिखित सन्देश होते हैं। आपके शत्रु की ओर से आये हुए इतने अमूल्य मोहरे की उपेक्षा ठीक नहीं है। राजनीति के पटल पर ऐसे प्यादे का उपयोग अवसर आने पर ठीक ढंग से हो सकता है।” “कविराज, इस प्रसंग में हमारा उतावला होना, निश्चित रूप से लाभदायक नहीं है। इस अकबर का स्वागत अपनी सीमा पर हमारे प्रतिनिधि ने क्यों किया? पता है? क्योंकि शहजादे के साथ राजपूताने का एक भला व्यक्ति भी है।” “दुर्गादास राठौड़,” कविराज ने कहा। “बिलकुल ठीक, वहाँ के हिन्दू दुर्गादास को धर्मनिष्ठ और रीति-नीति का प्रतीक मानते हैं। इसके अतिरिक्त एक और बात है जिसका आपको पता नहीं लग सका।” “किस बात का, राजन ? “औरंगजेब अपने अन्य शहजादों को तलवार की नोंक पर नचाता है। तब भी उसका सच्चा प्रेम अकबर से ही है। कारण यह है कि उसकी माँ दिलरास बानू शाहंशाह की लाड़ली बेगम थी। कविराज यद्यपि कि औरंगजेब जैसे दुष्ट मनुष्य पाषाण हृदय के होते हैं। इसी औरंगजेब ने काशी के विश्वेश्वर मन्दिर, मथुरा के केशव मन्दिर और सोमनाथ मन्दिर जैसे हमारे देवालयों को ध्वस्त किया। किन्तु ऐसे पाषाण हृदय मनुष्यों के भी दिल के कुछ कोने नाजुक और कमजोर होते हैं।” “वही कह रहा हूँ राजन! अब आप अधिक ‘भवति न भवति’ न करके शहजादे के पीछे खड़े हो जाइए।” “वैसी जल्दी करना ठीक नहीं कविराज! शहजादे ने अपने पिता के साथ विद्रोह किया है किन्तु भविष्य में ये बाप-बेटे परस्पर कैसा व्यवहार करेंगे? इसका 270 :: सम्भाजी

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