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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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केवल उस कल्पना से ही अण्णाजी को बड़ी राहत मिल रही थी। "परन्तु अण्णाजी यह सब होगा कैसे ?" हिरोजी आगे सरक आये। पन्त के कान के पास जाकर बोले, "फिर से पहले जैसा खेल खेलेंगे। सम्भाजी को जेल भेजेंगे और उस बच्चे राजाराम को गद्दी पर बिठायेंगे।" सारी बात अच्छी तरह निश्चित हो गयी। आखिर शहजादा अकबर कोई ऐरा-गैरा आदमी था। वह बादशाह का बेटा था। आज नहीं तो कल वह दिल्ली की गद्दी पर बैठेगा ही। उसकी सहायता से सम्भाजी को हटाने का निर्णय लिया गया। बात चीत के दौरान अण्णाजी का चेहरा क्रोध से तमतमा गया। उन्होंने कहा- "अब स्वराज्य में देवताओं और ब्राह्मणों के दिन नहीं रहे। इन शाक्तपन्थियों ने यहाँ का सारा वातावरण भ्रष्ट कर दिया है। मदिरापान, मांसभक्षण। छी. छी. जितना कहा जाये कम ही होगा। वह शम्भूराजा का मित्र है इसलिए हम उसे कितना सहें ? उसके लिए यहाँ रायगढ़ में नये महल की व्यवस्था, वहाँ गोवा के पास डिचोली में अपने साथ साथ इस लफंगे के लिए फिरंगियों से नया महल खरीद लिया। और अब उस मलकापुर में अपने साथ ही उसका महल बनना शुरू है। अरे मैं कहता हूँ, कौन है यह टिक्कोजी राव ? न अपनी जाति का न धर्म का ? फर्जन्द गणेश की सौगन्ध खाकर कहता हूँ, इस अमंगलमय वातावरण में हमारी जीने तक की इच्छा नहीं होती।" हिरोजी ने अण्णाजी को स्मरण दिलाते हुए कहा, "जितना भी सत्यानाश होना है एक बार हो जाने दीजिए। परन्तु पिछली बार की तरह हमें राजद्रोही ठहराने की नौबत न आए।" फर्जन्द की बात पर अण्णाजी बहुत क्रुद्ध हुए। वे गर्म सीसे की तरह तड़कते हुए बोले, "राजद्रोह शब्द का अर्थ कौन और किस तरह सिखाएगा ? यह सम्भाजी जो दिलेर खान के पास भाग गया था और जिसने शिवाजी जैसे पिता की आँख से आँसू गिराये-वह कुलकलंक ?" रात बीतती जा रही थी। बाहर तेज हवा चल रही थी। चिरागों में दो-दो बार तेल डाला गया। फिर भी बात समाप्त नहीं हो रही थी। ईश्वर को साक्षी मानकर सौगन्धें ली गयीं। बीच में किसी ने सोयराबाई के अपने पक्ष में आने के प्रति आशंका व्यक्त की। इस पर अण्णाजी ने धोती फटकारते हुए कहा, "यूँ ही किसी स्त्री को राजमाता का पद मिल रहा हो तो उसे बुरा लगेगा ? और सोयराबाई के सम्बन्ध में तो कहना ही क्या है ?" कुएँ के तल से निकलती हुई सी राहुजी सोमनाथ की आवाज आयी- "लेकिन बालोबा चिटणीस का क्या है ?" इस नये प्रश्न से अण्णाजी का खिला हुआ चेहरा एकदम उदास हो गया। सभी लोग घबराये हुए एक-दूसरे का मुँह देखने लगे। सम्भाजी : 279