छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरह काटा था। उसी पर्वत का सहारा लेकर हमारी लाखों की सेना में घुसकर मामू साहब साइस्ता खान की उसने उँगलियाँ तोड़ दी थीं। हमें अपमानित करके वह शिवाजी रात में ही भाग गया था। उसी बैताल नगरी में उस शिवा का बच्चा शैतानी खेल खेल सकता है। वर्षा के मौसम में सह्याद्रि पर आक्रमण असम्भव है। हमारी जानकारी के अनुसार वहाँ पर एक बार बरसात शुरू हो जाये तो छोटे-छोटे नाले भी बड़ी-बड़ी नदियाँ बन जाते हैं। वहाँ के नालों को भी दो-दो महीने तक पार करना असम्भव हो जाता है।" "पर जहाँपनाह, सम्भा वहाँ तमिलनाडु में चला गया है—बादशाह को इसकी खबर थी। वह हँसकर बोला—"देखेंगे बन्दर कितना नाचता है? उस चिक्कदेव की कैद से जिन्दा बचकर वापस आएगा तब आगे की सोचेंगे।" "पर जहाँपनाह, शुरुआत में नासिक और बागलण की ओर इतनी बड़ी फौज भेजने का कारण क्या है?" जुल्फिकारखान ने पूछा। आलमगीर दिल खोलकर हँसा। उसने गर्व से वजीर की ओर देखा। जुल्फिकार खान के प्रश्न से बादशाह प्रसन्न था। नक्शे पर उँगली फेरते हुए दोनों की ओर संकेत करके बोला, "यह देखो, यह बुरहानपुर से आने वाली राह खानदेश से नासिक, कल्याण और आगे रायगढ़ की ओर जाती है। अगर कल हमारी बदनसीबी से मराठों की बड़ी सेना शहजादा अकबर के साथ हो जाये और हमारे विद्रोही बेटे में इतनी हिम्मत आ जाये और अकबर तथा सम्भा इसी रास्ते से दिल्ली पर हमला बोल दें तो अनर्थ हो जाएगा। आगरा और दिल्ली में छिपे हमारे दुश्मन भी इसी प्रेत मंडली में जा मिलेंगे। इसलिए हम यहाँ धोखा नहीं खाना चाहते। नासिक से थाने तक के इलाके में इस रास्ते के सारे किलों और सारी चारी चौकियों पर हमारा क़ब्ज़ा होना चाहिए। आठ "रायप्पा, अच्छी तरह सँभालना बाबा। घाव को बढ़ने नहीं देना। अभी और युद्ध लड़ना है।" शम्भुराजा ने कहा। विशाल कावेरी नदी के किनारे एक घने जंगल में मराठों की सेना थी। शम्भुराजा की बाँह पर रायप्पा पट्टी बाँध रहा था। दस दिन पहले लगा घाव अब 408 : सम्भाजी