भारतकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 418, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 418

त्रिचनापल्ली की सीमा पर आने पर शम्भूराजा ने हरजी राजा को बाँहों में भर लिया। उम्र में छोटे शम्भूराजा को हरजी और अम्बिका दीदी ने असंख्य आशीर्वाद दिये। हरजी ने कहा, "शम्भूराजा, रायगढ़ और हिन्दवी स्वराज्य आपके हाथ में सदा सुरक्षित रहे।" शम्भूराजा ने भावुक होकर कहा, "दुर्भिक्ष के कारण आजकल अपना राज्य जर्जर हो गया है। जीजाजी आप दक्षिण रसद आपूर्ति सँभालें। फिर दस औरंगजेब भी हमारे ऊपर आक्रमण करें तो भी उसकी परवाह कौन करता है?" दस शम्भूराजा कर्नाटक की लड़ाई के बाद वापस आ गये थे। झंडे लगाकर उनका जोरदार स्वागत किया गया। आते आते ही शम्भूराजा ने येसूबाई को धन्यवाद दिया और बोले, "रानी साहब, हरजी राजा को दक्षिण का सूबेदार बनाने की आपकी सलाह बहुत उचित सिद्ध हुई। वरना मुझे तो यही लग रहा था कि हम पुराने कर्मचारी हणमन्त के साथ अन्याय कर रहे हैं। इस संवाद से येसूबाई प्रसन्नता से खिल उठीं। शम्भूराजा ने स्पष्ट शब्दों में यह भी कहा कि निंबालकर और शिर्के जैसे लोगों से महाड़िक कहीं अच्छे हैं। दो ही दिनों के बाद दुर्गादास राजा से मिलने आये और धीमी आवाज में कहने लगे— "शम्भूराजा शहजादा अकबर की प्रार्थना कुछ अलग है।" "क्या है?" "उनका कहना है कि आप शहजादे के साथ दिल्ली चलें।" "रायगढ़ को छोड़कर ? औरंगजेब जैसा अजगर मुँह खोलकर बैठा है। ऐसी स्थिति में हम कैसे जा सकते हैं?" "वे कहते हैं कि आप कर्नाटक-जिंजी तक इतना बड़ा युद्ध लड़कर कैसे आ गये?" "वह वर्षा का मौसम था दुर्गादास ! मेरे पिता द्वारा जीते गये क्षेत्र में गड़बड़ी चल रही थी। उसे समय रहते ठीक करना आवश्यक था।" "महाराज, शहजादे के साथ कम से कम सेना तो दीजिए।" "दुर्गादास, आपकी समझ में यह क्यों नहीं आता? हमारे हिन्दवी स्वराज्य की, उसकी प्रतिष्ठा की ध्वजा भले ही आकाश में उड़ रही हो। किन्तु हमारा 416 :: सम्भाजी

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास) · पृष्ठ 418, कुल 793 में से · BharatKosha