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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 465, कुल 793 में से

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तरह से उस फिरंगी को युद्ध में उतारना पड़ेगा।" दुर्गादास राठौर ने आग्रहपूर्वक कहा। राजापुर के पास की पहाड़ियों के समीप शम्भूमहाराज का तम्बू खड़ा किया गया है। तम्बू में महत्त्वपूर्ण विषय पर विचार-विमर्श चल रहा था। शम्भूमहाराज के सामने कवि कलश, दुर्गादास राठौर, शहजादा अकबर, सरदार येसाजी कंक बैठे थे। तम्बू के नीचे एक ढलान की बगल में राजापुर की खाड़ी थी। यहाँ पर पानी और हवा के साथ लहराने वाले नारियल और सुपारी के पेड़ थे। शम्भूमहाराज, सत्तर वर्ष की आयु को पहुँच रहे येसाजी कंक की ओर एकटक देख रहे थे। येसाजी बाबा के सिर पर बहारदार पगड़ी, शरीर पर जरीदार ढीला अँगरखा, कमर में लिपटा शुभ्र जामा सुशोभित थे। ऐसी वेशभूषा में उनकी वृद्ध छवि और भी खिल उठी थी। उनकी बगल में एक आकर्षक और तेजस्वी युवक बैठा था। लगभग पचीस वर्ष का वह युवक कृष्णाजी, येसाजी कंक का पुत्र था। शम्भूमहाराज ने कहा, "येसाजी आप हमारी थल सेना के सेनापति हैं। इस बार हम आप पर एक बड़ी जोखिमभरी जिम्मेदारी सौंप रहे हैं।" महाराज यदि आप आग में कूदने को कहें तो भी यह बूढ़ा किसी बात का विचार नहीं करेगा। महाराज अभी कल कोंडाजी जैसा वीर आपके लिए जलकर खाक हो गया। आज यह शिवाजी का येसाजी आपके लिए जलकर खाक होने के लिए तैयार है। गोवा पर आक्रमण करने की चर्चा होने लगी। वहाँ के बन्दरगाह वहाँ की खाड़ियाँ, फिरंगियों के किले, उनकी चर्चें, संरक्षण करने वाली फिरंगी सेनाएँ, पणजी का गोलाकार गुम्बद, सशक्त प्रवेश द्वार आदि सभी बातों पर विस्तार से चर्चा हुई। कांट दी आल्होर नामक फिरंगी से शम्भूमहाराज बहुत दुखी थे। उन्होंने कहा, "यह फिरंगी स्वार्थी, धोखेबाज और कमाल का नाटक करने वाला है। एक ओर तो यह पुत्ररत्न प्राप्ति के उपलक्ष्य में हमें बधाई का सन्देश भेजता है, बच्चे के लिए हीरे-जवाहिर और मणि-माणिक्य का उपहार तो दूसरी ओर यह जानकर कि नारवातीर्थ में हम बहुत कम सैनिकों के साथ आ रहे हैं, हमें जिन्दा पकड़कर बादशाह को सौंपने की योजना बनाता है अब बताइए इसका क्या किया जाए?" "आक्रमण, गोवा पर आक्रमण, और दूसरा क्या?" येसाजी कंक ने गरजकर कहा। "कल यदि औरंगजेब की फौज गोवा में आयी तो ये फिरंगी मेंढक की तरह कूदकर पहले उधर ही जाएँगे। ये चोर हमारे साथ मैत्री का जितनी भी दिखावा करें हम इनकी असलियत जानते हैं। हमें पता है कि पुर्तगालियों ने बादशाह के साथ एक अत्यन्त गुप्त लिखित समझौता किया है।" राजा ने सभी को बता दिया। सम्भाजी :: 463

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