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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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ही।'' बादशाह मन मसोसकर रह गया। वह फिर एक बार जोर से हँसते हुए बोला, “सम्भा तुमसे मुझे दो ही बातें चाहिए। एक तो धोखेबाज गद्दारों की सूची और दूसरे सह्याद्रि के सभी महत्त्वपूर्ण किलों की चाभियाँ, क़ब्ज़े के साथ।'' बादशाह की उस गर्जना को सुनकर सम्भाजी राजा को उस परिस्थिति में भी हँसी छूटने लगी। औरंगजेब का उपहास करते हुए सम्भाजी महाराज बोले, “मूर्ख बादशाह, सह्याद्रि के कन्धों पर बने हमारे मजबूत किले ही हमारी शोभा, सामर्थ्य और प्राण हैं। किससे क्या माँगने की मूर्खता कर रहे हो? कल तू ईद के चाँद से माँगेगा कि आकाश की सारी चाँदनी निकालकर मुझे दे दे, तो क्या ऐसा सम्भव है?'' सम्भाजी राजा के जवाब के इस ढंग से कोने से हँसी के फव्वारे छूटे। कवि कलश बादशाह की मूर्खता पर खिलखिलाकर हँस रहे थे। सम्भाजी राजा और कवि कलश द्वारा किये गये अपमान और उपहास से बादशाह भीतर ही भीतर बहुत बिफर गया था। वह अपने को बहुत बेइज्जत अनुभव कर रहा था। उसे रामशेज किले की याद आयी। एक अकेले रामशेज ने साढ़े छह वर्षों से नाक में दम कर दिया था। उसके अनेक बहादुर सरदार आँखों के आगे प्रत्यक्ष हो गये। वह सोचने लगा, इस हिसाब से मराठों के सभी बलशाली किलों को जीतने के लिए कितना समय लगाना पड़ेगा? इस कल्पना से बादशाह मन ही मन घबरा गया। फिर भी उसने राजबन्दियों के सामने अपनी बात रखी, “सम्भाऽऽ तू एक बात ध्यान रखना, दया माया, प्यार मुहब्बत जैसे झूठे जलवे हम अपने कलेजे से चिपकाकर कभी नहीं रखते। हम खुले सत्य के पुजारी हैं। हम तुमसे वादा करते हैं। तुम अपने सारे किलों का कब्ज़ा मेरे अधिकारियों के ताबे में दे दो और अपने इस दोस्त के साथ ऐयाशी करने के लिए किसी भी प्रदेश में चले जाओ।” “वाहऽ बादशाह।” कवि कलश खखाकर हँसे। “यह मजाक नहीं है, मूर्ख शायर। चाहो तो कुरान शरीफ पर हाथ रखकर हम तुम्हें वचन देते हैं।” बादशाह की ओर देखकर सम्भाजी राजा व्यंग्य से हँसे। वे कहने लगे, “हमारे गढ़ों-दुर्गों की चाभियाँ लेने के लिए तू बहुत ही बेताब दिख रहा है बादशाह! बिना लड़े ही चुपचाप किलों का क़ब्ज़ा दे देने को कह रहा है तू?” “बिल्कुल।” “ऐसी फूँका फूँकी और बिना प्रयत्न के अधिकार जमाना है तो तू उधर उत्तर की ओर क्यों नहीं जाता? वहाँ तुम्हारी तरह के लोगों को चाभियाँ मिल जाती हैं। किन्तु उसके लिए नक्षत्र जैसी अपनी बहू बेटियों के हाथ दुश्मनों के हवाले करके सम्भाजी :· 735