भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 130, कुल 504 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 130

अथ मन का अंग १० मंगलाचरण दादू नमो नमो निरंजनं, नमस्कार गुरुदेवतः । वंदनं सर्व साधवा, प्रणामं पारंगततः ॥ 1 ॥ दादू यहु मन बरजि बावरे, घट में राखि घेरि । मन हस्ती माता बहै, अंकुश दे दे फेरि ॥ 2 ॥ हस्ती छूटा मन फिरे, क्यों ही बँध्या न जाइ । बहुत महावत पच गये, दादू कछु न वशाइ ॥ 3 ॥ जहाँ थैं मन उठ चलै, फेरि तहाँ ही राखि । तहँ दादू लै लीन कर, साध कहैं गुरु साखि ॥ 4 ॥

  • 130 -
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक) · पृष्ठ 130, कुल 504 में से · BharatKosha