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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 173, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-सांच का अंग 13 सत्य असत्य गुरु पारख लक्षण आई रोजी ज्यों गई, साहिब का दीदार। गहला लोगों कारणैं, देखै नहीं गँवार ॥ 116 ॥ पतिव्रत निष्काम दादू सोई सेवक राम का, जिसे न दूजी चिंत। दूजा को भावै नहीं, एक पियारा मिंत ॥ 117 ॥ भ्रम विध्वंसण अपनी अपनी जाति सौं, सब को बैसैं पांति। दादू सेवग राम का, ताके नहीं भरांति ॥ 118 ॥ चोर अन्याई मसखरा, सब मिलि बैसैं पांति। दादू सेवक राम का, तिन सौं करें भरांति ॥ 119 ॥ दादू सूप बजायां क्यों टलै, घर में बड़ी बलाइ। काल झाल इस जीव का, बातन ही क्यों जाइ?120 ॥ साँप गया सहनाण को, सब मिलि मारैं लोक। दादू ऐसा देखिए, कुल का डगरा फोक ॥ 121 ॥ दादू दोन्यूँ भरम हैं, हिन्दू तुरक गंवार। जे दुहुवाँ थैं रहित है, सो गहि तत्त्व विचार ॥ 122 ॥ अपना अपना कर लिया, भंजन माँही बाहि। दादू एकै कूप जल, मन का भ्रम उठाहि ॥ 123 ॥ दादू पानी के बहु नाम धर, नाना विधि की जात। बोलणहारा कौन है, कहो धौं कहाँ समात ॥ 124 ॥ जब पूरण ब्रह्म विचारिये, तब सकल आत्मा एक। काया के गुण देखिये, तो नाना वरण अनेक ॥ 125 ॥ अमिट पाप प्रचण्ड भाव भक्ति उपजै नहीं, साहिब का प्रसंग। विषय विकार छूटै नहीं, सो कैसा सत्संग ॥ 126 ॥

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