भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-शब्द का अंग 22

दादू राम रसायन भर धन्या, साधुन शब्द मंझार । कोई पारखि पीवै प्रीति सौं, समझै शब्द विचार ॥ 27 ॥ शब्द सरोवर सुभर भव्या, हरि जल निर्मल नीर । दादू पीवै प्रीति सौं, तिन के अख्रिल शरीर ॥ 28 ॥ शब्दों मांहिं राम-रस, साधों भर दीया । आदि अंत सब संत मिलि, यों दादू पीया ॥ 29 ॥ गुरुमुख कसौटी कारज को सीझै नहीं, मीठा बोलै बीर । दादू साचे शब्द बिन, कटै न तन की पीर ॥ 30 ॥ शब्द दादू गुण तजि निर्गुण बोलिये, तेता बोल अबोल । गुण गहि आपा बोलिये, तेता कहिये बोल ॥ 31 ॥ साचा शब्द कबीर का, मीठा लागै मोहि । दादू सुनतां परम सुख, केता आनन्द होहि ॥ 32 ॥ इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य बाईसवां शब्द काअंग सम्पूर्ण ॥ अंग 22 ॥ साखी 32 ॥

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