सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग केदार 6 ऐसैं यहु सब हाट पसारा, आप आपको जाइ ॥ 1 ॥ कोइ नहिं तेरा सजन संगाती, जनि खोवे मन मूल । यहु संसार देखि जनि भूलै, सब ही सैंबल फूल ॥ 2 ॥ तन नहिं तेरा धन नहिं तेरा, कहा रह्यो इहि लाग । दादू हरि बिन क्यों सुख सोवे, काहे न देखे जाग ॥ 3 ॥ 135. तर्क चेतावनी । प्रतिपाल जात कत मद को मातो रे । तन धन जोबन देख गर्वानो, माया रातो रे ॥ टेक ॥ अपनो हि रूप नैन भर देखै, कामिनी को संग भावै रे । बारम्बार विषय रत मानैं, मरबो चित्त न आवै रे ॥ 1 ॥ मैं बड़ आगे और न आवे, करत केत अभिमाना रे । मेरी मेरी करि करि फूल्यो, माया मोह भुलानां रे ॥ 2 ॥ मैं मैं करत जन्म सब खोयो, काल सिरहाणे आयो रे । दादू देख मूढ़ नर प्राणी, हरि बिन जन्म गँवायो रे ॥ 3 ॥ 136. हितोपदेश । त्रिताल जागत को कदे न मूसै कोई । जागत जान जतन कर राखै, चोर न लागू होई ॥ टेक ॥ सोवत साह वस्तु नहिं पावे, चोर मूसै घर घेरा । आस पास पहरे को नाहीं, वस्ते कीन नबेरा ॥ 1 ॥ पीछे कहु क्या जागे होई, वस्तु हाथ तैं जाई । बीती रैन बहुरि नहिं आवै, तब क्या करि है भाई ॥ 2 ॥ पहले ही पहरे जे जागै, वस्तु कछू नहिं छीजे । दादू जुगति जान कर ऐसी, करना है सो कीजे ॥ 3 ॥
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