सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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अथ राग रामकली ४ (गायन समय प्रभात 3 से 6 ) 167. सद्गुरु शब्द महिमा । दादरा शब्द समाना जो रहै, गुरु बाइक बीधा । उनही लागा एक सौं, सोई जन सीधा ॥ टेक ॥ ऐसी लागी मर्म की, तन मन सब भूला । जीवत-मृतक है रहै, गह आत्म मूला ॥ 1 ॥ चेतन चितहि न बीसरे, महारस मीठा । शब्द निरंजन गह रह्या, उन साहिब दीठा ॥ 2 ॥ एक शब्द जन ऊधरे, सुनि सहजैं जागे । अंतर राते एक सौं, सर सन्मुख लागे ॥ 3 ॥ शब्द समाना सन्मुख रहै, पर आतम आगे । दादू सीझै देखतां, अविनाशी लागे ॥ 4 ॥
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