सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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राग सोरठ अथ राग सोरठ 19 (गायन समय रात्रि 9 से 12) 298. स्मरण । उत्सव ताल कोली साल न छाड़ै रे, सब घावर काढै रे ।। टेक ।। प्रेम पाण लगाई धागै, तत्त्व तेल निज दीया । एक मना इस आरंभ लागा, ज्ञान राछ भर लीया ।। 1 ।। नाँव नली भर बुणकर लागा, अंतरगति रंग राता । ताणैं बाणें जीव जुलाहा, परम तत्व सौं माता ।। 2 ।। सकल शिरोमणि बुनैन विचारा, सान्हाँ सूत न तोड़ै । सदा सचेत रहै ल्यौ लागा, ज्यौं टूटै त्यौं जोड़ै ।। 3 ।। ऐसे तनि बुनि गहर गजीना, सांई के मन भावै । दादू कोली करता के संग, बहुरि न इहि जग आवै ।। 4 ।।
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