सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग सोरठ 19 जागत सूते, सोवत सूते, जब लग राम न जाना । जागत जागे, सोवत जागे, जब राम नाम मन माना ॥ 1 ॥ देखत अंधे, अंध भी अंधे, जब लग सत्य न सूझै । देखत देखे, अंध भी देखे, जब राम सनेही बूझै ॥ 2 ॥ बोलत गूंगे, गूंगे भी गूंगे, जब लग सत्य न चीन्हा । बोलत बोले, गूंगे भी बोले, जब राम नाम कह दीन्हा ॥ 3 ॥ जीवत मूये, मूये भी मूये, जब लग नहीं प्रकासा । जीवत जीये, मुये भी जीये, दादू राम निवासा ॥ 4 ॥ 307. नाम महिमा । एक ताल रामजी ! नाम बिना दुख भारी, तेरे साधुन कही विचारी ॥ टेक ॥ केई जोग ध्यान गह रहिया, केई कुल के मारग बहिया । केई सकल देव को ध्यावैं, केई रिधि सिधि चाहैं पावैं ॥ 1 ॥ केई वेद पुराणों माते, केई माया के संग राते । केई देश दिशंतर डोलैं, केई ज्ञानी ह्वै बहु बोलैं ॥ 2 ॥ केई काया कसैं अपारा, केई मरैं खड्ग की धारा । केई अनंत जीवन की आशा, केई करैं गुफा में वासा ॥ 3 ॥ आदि अंत जे जागे, सो तो राम नाम ल्यौ लागे । इब दादू इहै विचारा, हरि लागा प्राण हमारा ॥ 4 ॥ 308. भ्रम विध्वंसन । एक ताल साधो ! हरि सौं हेत हमारा, जिन यहु कीन्ह पसारा ॥ टेक ॥ जा कारण व्रत कीजे, तिल तिल यहु तन छीजे । सहजैं ही सो जाना, हरि जानत ही मन माना ॥ 1 ॥ जा कारण तप जइये, धूप सीत सिर सहिये । सहजैं ही सो आवा, हरि आवत ही सचु पावा ॥ 2 ॥
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